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Title: दिवानखेड़ा पंचायत का बड़ा फैसला जो परिवार बेटी को पढ़ाने में असमर्थ उनका हम उठाएंगे खर्च
Author: Young Flame
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समाज में भावना जरूरी दिवानखेड़ा में एसडीएम की अध्यक्षता में लिए फैसले  #dabwalinews.com खंड में इस वर्ष सबसे कम बेटियों की जन्मदर...
समाज में भावना जरूरी
दिवानखेड़ा में एसडीएम की अध्यक्षता में लिए फैसले 
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खंड में इस वर्ष सबसे कम बेटियों की जन्मदर वाली पंचायत ने बेटियां बचाने और पढा़ने के लिए गुरुवार को ग्राम सभा में विशेष फैसले लिए। इसमें जरूरतमंद परिवार की बेटियों की पढ़ाई का खर्च उठाने और घायल जनमानस गाय के उपचार कराने का खर्च वहन करने का फैसला लिया। साथ ही समाज पर्यावरण के लिए अच्छे कार्य करने वालों को सम्मानित करने का निर्णय लिया।
गांव दिवानखेड़ा के राजकीय प्राथमिक स्कूल में गुरुवार को दोपहर बाद 3 बजे विशेष ग्राम सभा मुख्यातिथि एसडीएम संगीता तेत्रवाल की मौजूदगी में शुरू हुई। इसमें सरपंच सुबेग सिंह ने कहा कि खंड स्तरीय सेमीनार में गांव का नाम बेटियों की सबसे कम जन्मदर वाले गांवों में लिया गया तो लज्जा महसूस हुई। इससे ग्रामीणों प्रशासन के साथ मिलकर बेटियों के लिए महफूज बनाने का निर्णय लिया। इसके चलते गांव में स्थिति जानकार विशेष कार्ययोजना बनाई है। इसके तहत ग्राम सभा में चर्चा कर सभी प्रस्तावाओं को पारित किया गया। इसमें जो परिवार बेटी को पढ़ाने में असमर्थ हैं तो ऐसी बेटियों को पंचायत पढ़ाई और उनके इच्छित काेर्स कराते हुए खर्च वहन करेगी। गांव में बहू को बेटी बनाकर बिना दहेज बिना घूंघट लाने पर परिवार को 11 हजार रुपये का पुस्कार देकर विशेष तौर पर सम्मानित किया जाएगा। वहीं खेल, शिक्षा, संस्कृति अन्य उपलब्धियों में गांव का नाम रोशन करने वाली बेटियों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही कोई भी ग्रामीण अपने खेत या सरकारी संस्थान में पाैधा लगाकर एक साल देखरेख करें तो ऐसे पर्यावरण प्रेमियों को 500 रुपये देकर सम्मानित किया जाएगा। इसी प्रकार किसी घायल मरीज का उपचार कराने का खर्च भी पंचायत वहन करेगी। इसी प्रकार कोई गाय घायल हो तो उसका उपचार कराने और मृत गोवंश को देखकर गुजरने की बजाय उसका संस्कार करने पर खर्चा पंचायत देगी।
एसडीएम संगीता तेत्रवाल ने कहा कि बेटियाें के प्रति समाज में प्राेत्साहित भावना होना जरूरी है। बेटे और बेटियों को संस्कारवान बनाएं। इस गांव की बेटियां भी बड़ी अफसर, डाॅक्टर, खिलाड़ी प्रेरणादायक पात्र बनें। तहसीलदार नौरंगदास ने कहा कि ग्रामीण बेटे बेटियों को अाज्ञाकारी उच्चशिक्षित बनाएं। 
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