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मंगलवार, अक्तूबर 04, 2016

रामलीला में लौट आया हैं 57 वर्षीय दशरथ, जानिए क्या है ख़ास बात


#dabwalinews.com
अनाज मंडी रोड स्थित रामलीला मैदान में जय श्रीराम नगर नाट्यशाला के मंच पर रामलीला मंचन में इस बार दशरथ केकिरदार में लौट आये हैं 57 वर्षीय कलाकार –
फाइल फोटो -वासदेव मेहता एक फनी  किरदार के रोल में
फाइल फोटो -वासदेव मेहता एक फनी किरदार के रोल में
चौंक गए न आप? चलिए हम आपको बताते है ये कौन शक्ष है ये शहर के सबके दिलो पर राज करने वाले वासदेव मेहता है जिन्होंने जो कहा वो किया यानी करनी और कथनी में इनके कोई फर्क नहीं,,,,,,किरदार कोई भी हो हर जगह फिट, इन्होने सन 1976 से रामलीला में मंचन करना शुरू किया और आज दर्जनों ऐसे किरदार निभा चुके है जिनका हर कोई दीवाना है 
रामलीला में लौट आया हैं 57 वर्षीय दशरत  – वासदेव मेहता ने अपनी जिन्दगी में सभी रोल किये मंत्री से लेकर महाराजा तक के पात्र बखूबी निभाए ,,,,मेग्नाथ, बाली, रावण, कोशैल्य, ककई सहित कई लेडिज किरदार भी निभाए है उन्होंने हर क्षेत्र में महारथ हासिल कि आइये जान लेते इसके लिए वे कैसे करते है इस उम्र में भी तैयारी  रामलीला से पूर्व वे एक महिना तैयारी शुरू कर करते है
बचपन का शौंक—-मेहता साहिब बताते है कि उन्हें यह बचपन में ही शौंक पैदा हो गया था आज वो श्री हनुमानजी के भगत है और स्कुल हो या कोई भी मंच  हर मुकाम पर वासदेव जी ने हर किरदार को निभाया और नतीजा आज डबवाली के इतिहास की रामलीला में लोगो की आस्था बरकरार है हर किसी की मन कि मुरदे पूरी होती है 
त्रिवेणी शहर डबवाली में होने वाली रामलीला 55 सालों का अनूठा रिकॉर्ड कायम कर लोगो के लिए आस्था  और आकर्षण का मुख्य केंद्र बन चुकी है श्री राम नाटयशाला रामलीला  डबवाली की रामलीला कई राज्यों के श्रध्दालुओ के आस्था का  केंद्र बनी हो तो सिरसा के इतिहास में सबसे बड़ी रामलीला में शुमार है  रामलीलाके कलाकार अच्छाई कीबुराई पर जीत की कहानी सुनाते हैं लेकिनकालोनी रोड स्तिथ ग्राउंड में आयोजित होने वाली रामलीला के साथ तो सांप्रदायिक सौहार्द्र की कहानी भी जुड़ी है।
साल 1960 में  सरदारी मिढ़ा, भगवान दास सिडाना, के दिलावर, खुशहाल चंद मेहता व बनवारी डोडा आदि ने मिलकर रामलीला का मंचन शुरू किया था।  इसलिए संस्था का नाम जय श्री राम नगर नाट्यशाला पड़ा। नाट्यशाला निदेशक के दिलावर ने बताया कि 1969 में जब आरके चलाना रामलीला के साथ जुड़े तो उनके द्वारा की गयी आर्थिक व अन्य मदद से इस रामलीला का रंग रूप बदलने लगा। इसके अलावा 56 वर्ष से लगातार रामलीला का मंचन किया जा रहा है। 
वहीँ हर रोज हजारो के संख्या में उमड़ने वाली भीड़ और दर्शको के लिए बैठने की व्यस्व्था लाइटें मुख्य आकर्षण का केद्र बने हुए है

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