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शुक्रवार, दिसंबर 30, 2016

8 नवंबर के बाद 2600 रुपये गिरा सोना, हड़बड़ी में सोना खरीदने वालों को अब सता रहा इनकम टैक्स के ऑडिट का डर

इंद्रमोहन शर्मा | dabwalinews.com

नोटबंदी के 50 दिन पूरे होने के बावजूद सोने के दाम में लगातार गिरावट जारी है। सोने के दाम 30,900 रुपये प्रति दस ग्राम से घटकर 28,300 रुपये तक पहुंच चुके हैं। यानि नोटबंदी के बाद सोना 2,600 रुपये तक गिर चुका है। यही हाल चांदी का भी है। चांदी अब तक के सबसे निचले स्तर पर गिरकर 39,500 रुपये के आसपास पहुंच गई है। ज्वेलर्स का कहना है कि अभी सोने और चांदी के दामों में और कमी आएगी।
बता दें, शहर में गोल्ड खरीद बेच के करीब 250 कारोबारी हैं जिनमें रिटेलर, होलसेलर और जॉब वर्कर शामिल हैं। लेकिन सभी कारोबारियों का धंधा मंदा हो चुका है। इस बीच जिन लोगों ने बीती 8 नवंबर की आधी रात के बाद से नोटबंदी लागू होने के बाद सोना खरीदा था उन लोगों में अब हड़बड़ी भी मची हुई है। उनको एक ओर जहां आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है वहीं सोना रखने के नियम लागू होने से उन्हें इनकम टैक्स के ऑडिट होने का भय भी सताने लगा है। सोन की खरीद फरोख्त का ज्यादातर कारोबार कैश से ही होता रहा है लेकिन सरकार ने अब कैशलेस भुगतान पर जोर दिया हुआ है। इसलिए भी सोना चांदी का कारोबार मंदा हो गया है।
घर में इतनी ज्यूलरी रखने की छूट
विवाहितमहिला 500 ग्राम
अविवाहित महिला 250 ग्राम
विवाहित पुरुष 100 ग्राम
अविवाहित पुरुष 50 ग्राम

(उपरोक्त लिमिट तक ज्यूलरी सीज नहीं की जाती। वैसे कितनी भी मात्रा में ज्यूलरी और सोने के बिस्कुट रख सकते हैं लेकिन कमाई का स्रोत बताना होता है और उस हिसाब से आयकर रिटर्न भी भरनी जरूरी है)

सोना खरीदने वालों को हो रहा घाटा
नोट बंदी के बाद जिन लोगों ने जल्दबाजी में सोना खरीदा उन्हें पहले दिन से ही घाटा होना शुरू हो गया था। वह घाटा अब बढ़कर करीब 50 फीसदी तक पहुंच गया है। इन लोगों को इनकम टैक्स ऑडिट का डर भी अलग से रहेगा। इसलिए फिलहाल सोना आफत बना हुआ है।' आनंदशंकर, सीए, सिरसा
सोने का कारोबार सिर्फ डिमांड पर ही टिका होता है
सोने का कारोबार सिर्फ डिमांड पर ही टिका होता है। नोटबंदी की बाद सोने का कारोबार शून्य हो चुका है और वह शून्यता अभी तक बरकरार है। लोगों के पास कैश की कमी होने से सोने की डिमांड ही नहीं रही। दिसंबर खत्म होने कगार पर चुका है। सीजन के दिन भी जा रहे हैं। नोटबंदी के 50 दिन पूरे होने के बाद भी अगर बैंकों में कैश का फ्लो नहीं बढ़ा तो सोने की कीमत में और गिरावट सकती है। रमेशकुमार सोनी, उर्फ काका, प्रधान, स्वर्णकार संघ, सिरसा
गोल्ड में इस वजह से आई गिरावट
लोग पहले टैक्सेशन विभाग से छिपाकर रखे रुपयों से सोना खरीद लेते थे। नोटबंदी के बाद वे रुपये अब बैंकों में जमा हो चुके हैं और वह सरकार की नजर में है। इसलिए हरेक के लिए अब सोना खरीदकर रखना मजबूरी नहीं है।
सरकार अब लॉकरों में रखे सोना या फिर घरों में रखे सोना को बाहर लाने के नियम भी लागू कर रही है। एेसे में फिजिकल गोल्ड घर में रखने से बचने की सलाह भी दी जाने लगी है।
कालाधन बाजार से निकलने के बाद चीजों की कीमतों में हलचल रहेगी। ऐसे में फिलहाल गोल्ड की डिमांड नहीं रहेगी। इसलिए जिनके पास गोल्ड है, उसकी रीसेल वेल्यू बढ़ने के भी चांस नहीं हैं।

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