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बुधवार, अप्रैल 12, 2017

ये हैं भारत के पहले जासूस, जिन्होंने बनाई थी RAW और NSG

 #dabwalinews.com
भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को जासूसी के आरोप में पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने मौत की सजा सुनाई है। पाकिस्तान का दावा है कि जाधव पहले इंडियन नेवी में नौकरी कर चुके हैं। बता दें कि रॉ यानि 'रिसर्च एंड एनालिसिस विंग' की शुरुआत आर.एन. काव ने की थी। काव ने ही उस दौर में इजरायली इंटेलिजेंस एजेंसी मोसाद से सीक्रेट कॉन्टेक्ट बनाए थे, जब भारत-इजरायल के रिलेशन न के बराबर थे।
चीन और पाकिस्तान से वॉर के बाद महसूस हुई रॉ की जरूरत...
- 1962 में चीन और 1965 में पाकिस्तान से वॉर के बाद भारत को रियलटाइम फॉरेन इंटेलिजेंस की जरूरत महसूस हुई। 
- तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी ने इंटेलिजेंस ब्यूरो के अलावा 1968 में दूसरी विंग शुरू करवाई। इसे 'रिसर्च एंड एनालिसिस विंग' यानि रॉ कहा गया। 
- रामेश्वर नाथ काव इसके पहले चीफ थे। वे 1977 तक रॉ के चीफ रहे। 
- वह भारत सरकार के केबिनेट सेक्रेटिएट में सेक्रेटरी (रिसर्च) भी रहे। 
- काव जवाहर लाल नेहरू के पर्सनल सिक्युरिटी चीफ और राजीव गांधी के सिक्युरिटी एडवाइजर भी रहे। 
- काव की पर्सनल लाइफ बेहद प्राइवेट थी। रिटायरमेंट के बाद वे शायद ही कभी पब्लिक में देखे गए। उनकी कुछ ही तस्वीरें इंटरनेट पर अवेलेबल हैं। 
- 1982 में फ्रेंच एक्सटर्नल इंटेलिजेंस एजेंसी SDECE के चीफ एलेक्जेंडर दे मेरेन्चेस ने काव की गिनती 70 के दशक में दुनियाभर के पांच टॉप इंटेलिजेंस ऑफिसर्स में की।

पर्सनल लाइफ

- काव का जन्म 10 मई 1918 को यूपी के कानपुर में एक कश्मीरी पंडित फैमिली में हुआ। उनका परिवार श्रीनगर से कानपुर माइग्रेट हुआ था। 
- 1940 में उन्होंने इंडियन इम्पीरियल सर्विसेज (इंडियन सिविल सर्विसेज) में 'असिस्टेंट सुपरीटेंडेंट ऑफ पुलिस' (कानपुर) से करियर की शरुआत की। 
- उनका पहला असाइनमेंट आजादी के बाद इंडियन वीआईपी की सिक्युरिटी देना था। 
- आजादी के बाद उन्हें इंटेलिजेंस ब्यूरो में डेप्युटेड कर दिया गया। उन्हें वीआईपी सिक्युरिटी का चार्ज दिया गया। 
- 50 के दशक में उन्हें घाना भी भेजा गया। वहां उन्हें तत्कालीन इंटेलिजेंस और सिक्युरिटी ऑर्गेनाइजेशन बनाने में सरकार की मदद के लिए भेजा गया था।

काव की टीम को कहा जाता था 'काउबॉयज'
- शुरुआत में रॉ के लिए 250 एजेंट चुने गए। एजेंसी को ऑपरेशन शुरू करने के लिए 2 करोड़ रुपए का बजट अलॉट किया गया।
- अगले कई सालों में रॉ ने काव के नेतृत्व में कई कॉवर्ट ऑपरेशन्स को अंजाम दिया। काव की टीम को 'काउबॉयज' कहा जाने लगा था। 
- रॉ बनाए जाने के तीन साल बाद ही पूर्वी पाकिस्तान को आजाद करवाकर बांग्लादेश बनाया गया। इसमें भी काव का अहम रोल था। 
- बताया जाता है कि इस इंटेलिजेंस एजेंसी ने इतनी सटीक इन्फॉर्मेशन दी, जिससे इंडियन आर्मी को ऑपरेशन चलाने में काफी मदद मिली।
- रॉ ने चिटगांव पोर्ट पर पहुंचे पाकिस्तानी नेवी शिप की भी सही लोकेशन इंडियन नेवी तक पहुंचाई।

सिक्किम को भारत का 22वां राज्य बनवाया
- 1975 में सिक्किम को भारत का 22वां राज्य बनाना भी काव और उनकी टीम की मदद से पॉसिबल हो पाया। 
- कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि 70 और 80 के दशक में तमिल गुरिल्ला फाइटर्स को ट्रेनिंग और श्रीलंका से जुड़े मामलों में भी काव की भूमिका है। 
- ज्वाइंट इंटेलिजेंस कमेटी के चेयरमैन के.एन. दारूवाला के मुताबिक, "काव के दुनियाभर में जबरदस्त कॉन्टेक्ट्स थे। एशिया, अफगानिस्तान, ईरान, चीन हर जगह। वो एक फोन कॉल से चीजें बदल देते थे।"



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