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शनिवार, जनवरी 06, 2018

धड़ल्ले से परोसा जा रहा है बासी खाना

#dabwalinews.com
अगर आप बाहर की खाना खाने के शौकीन हैं तो जरा सावधान रहें, क्योंकि जो खाना खाकर आप अपनी भूख शांत करने जा रहे हैं कहीं वह आपको अस्पताल न पहुंचा दें। यह बात पढक़र आपको हैरानी भी हुई होगी लेकिन यह बात सौ प्रतिशत सच है। शहर के अनेक होटल, रैस्टोरैंट, ढाबों, रेहडिय़ों पर बीते लम्बे अर्से से बासी खाना परोसा जा रहा है, जिसके चलते लोगों के बीमार होने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिस खाद्य विभाग को लोगों की सेहत से खिलावड़ करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है आखिरकार वह धृतराष्ट्र क्यों बना हुआ है।
लोगों की सेहत से खिलावाड़ करने वालों के खिलाफ न जुर्माना न कार्रवाई इस बात की गवाही दे रही है कि खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों को होटलों व रैस्टोरैंट आदि से भारी चढ़ावा चढ़ रहा है। जब इस बाबत खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि वे बिना शिकायत के अगर किसी होटल या रैस्टोरैंट आदि पर जांच करने के लिए पहुंचते है तो वे शिकायत कर देते हैं कि उन्हें तंग किया जा रहा है।
दो लाख रूपये जुर्मान व कैद भी हो सकती हैै हर जिले में खाद्य व सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। इन अधिकारियों का काम होटलों, रैस्टोंरैंट व रेहड़ी आदि खाद्य पदार्थ विक्रय करने वाले संस्थानों में जांचकर सैंपल लेना है। सैंपलों की जांच विभाग की लैबोरेट्री में की जाती है। शिकायतों पर खाद्य पदार्थ सुरक्षा अधिकारी जांच कर सकते है। फिर खुद ही संज्ञान लेकर कार्रवाई की जा सकती है। जांच में यदि खाद्य पदार्थ में सामान्य मिलावट या सेहत के लिए हानिकारक होने पर दो हजार से 2 लाख जुर्माना हो सकता है। इस खाद्य पदार्थ में सेहत का नुक्सान होने पर एफ्रआईआर और कोर्ट में केस दर्ज किया जा सकता है।
त्यौहारी सीजन में होती है सैंपलिंग
 खाद्य विभाग की तरफ से त्यौहारी सीजन में ही कुछ होटल-मिठाई की दुकानों में खाने-पीने की चीजों की जांच की जाती है। ऐसे पदार्थों का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा जाता है। दीवाली और होली के आसपास ही मिलावटी मिठाइयां और अन्य खाने-पीने की चीजों का लेकर जांच के साथ सैंपल लेते हैं। कई मामलों में देखा गया है कि खाद्य पदार्थ और मिठाइयों के सैंपल की जांच रिपोर्ट त्यौहारी सीजन खत्म होने के बाद ही आते है। ऐसे में आम आदमी कभी जान भी नहीं पाता कि किसी पर कोई कार्रवाही हुई या नहीं। सैंपल सही आया या खामियों से भरा हुआ इसका भी पता नहीं चल पाता।

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