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Title: डीएवी संस्थान ने स्थानीय अदालत में जमा करवाई मुआवजा राशि
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डबवाली- लंबे संघर्ष के बाद आखिर वह दिन आ ही गया जब उच्च न्यायालय से हार का सामना करने के बाद डीएवी संस्थान को स्थानीय न्यायालय के आद...

डबवाली-

लंबे संघर्ष के बाद आखिर वह दिन आ ही गया जब उच्च न्यायालय से हार का सामना करने के बाद डीएवी संस्थान को स्थानीय न्यायालय के आदेशानुसार अग्रि कांड पीडि़तों को दी जाने वाली बकाया राशि को जमा करवाने के आदेशों की पालना करते हुए बुधवार को 3 करोड़ 48 लाख 9 हजार 953 रूपये राशि अदा करने को मजबूर होना पड़ा है। इससे पूर्व 27 दिसम्बर 2017 को भी डीएवी संस्थान द्वारा 4 लाख 53 हजार 913 रूपये की राशि जमा करवाई थी। इस प्रकार कुल राशि 3 करोड़ 45 लाख 63 हजार 866 रूपये की राशि अग्रिपीडि़तों के जख्मों पर मरहम लगाने के लिए स्थानीय अदालत में जमा करवा दी गई है। यह जानकारी देते हुए डबवाली अग्रिकांड पीडि़त संघ के प्रवक्ता विनोद बांसल ने बताया कि अब यह राशि 405 मृतकों के परिजनों व 88 घायल लोगों को उच्च न्यायालय के आदेशानुसार वितरित की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि 23 दिसम्बर 1995 को डबवाली के भीष्णअग्निकांड में 442 लोागों की जान चली गई जबकि लगभग 150 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। जिनमें स्कूली बच्चों और महिलाओं की संख्या अधिक थी। इस बड़े हादसे के बाद डबवाली अग्रिकांड पीडि़त संघ ने वर्ष 1996 में घायलों के उपचार तथा मुआवजा संबंधी याचिका पंजाब- हरियाणा उच्च न्यायालय में दायर की थी। जनवरी 2003 में उच्च न्यायालय ने मुआवजा की गणना के लिए एक सदसीय आयोग जस्टिस टीपी गर्ग  (सेवा निवृत जज इलाहबाद हाईकोर्ट) की अध्यक्षता में गठित किया था। बांसल ने बताया कि इसकी रिपोर्ट मार्च 2009 में उच्च न्यायालय में पेश की गई तथा उच्च न्यायालय ने 9 नवम्बर 2009 को अग्रिकांड पीडि़तों को मुआवजा देने की घोषणा की थी जिसमें से 45 प्रतिशत राशि हरियाणा सरकार द्वारा अदा की जानी थी तो वहीं 55 प्रतिशत राशि डीएवी संस्थान द्वारा अदा की जानी थी। हरियाणा सरकार ने अपने हिस्से की मुआवजा राशि उसी समय जमा करवा दी थी जबकि डीएवी उच्चतम न्यायालय की शरण में चला गया था। उच्चतम न्यायालस के आदेशानुसार डीएवी संस्थान ने 10 करोड की मुआवजा राशि 15 मार्च 2010 को न्यायालय में जमा करवा दी जबकि वर्ष 2013 में उच्चतम न्यायालय से अपील खारिज होने के बाद डीएवी संस्थान ने अपने हिसाब से मुआवजा राशि 17 करोड़ 120 रूपये न्यायायल में जमा करवाए थे। वर्ष 2016 में उच्चतम न्यायालय द्वारा ब्याज राशि के मामले में स्पष्टीकरण देने के उपरांत भी डीएवी संस्थान ने मुआवजा राशि जमा नहीं करवाई थी। इसके बाद डबवाली अग्रिकांड पीडि़त  संघ ने वर्ष 2017 में स्थानीय अदालत में दावा दायर कर डीएवी के बैंक खाते व प्रोपर्टी कुर्क करने की मांग की थी। 11 दिसम्बर 2017 को स्थानीय अदालत ने डीएवी को 22 दिसम्बर 2017 तक राशि जमा करवाने के आदेश दिए थे, लेकिन डीएवी संस्थान ने उच्च न्यायालय में अपील कर फिर से गणना की मांग की थी। फिर से गणना होने के बाद 18 फरवरी 2018 को स्थानीय अदालत ने डीएवी संस्थान को 2 करोड़ 29 लाख 86 हजार 292 रूपये की राशि 10 प्रतिशत ब्याज सहित 28 फरवरी तक जमा करवाने के आदेश दिए। डीएवी संस्थान फिर से उच्च न्यायालय चला गया। 28 फरवरी को उच्च न्यायालय की एकल बैच ने डीएवी की अपील को खारिज कर दिया। डीएवी संस्थान दूसरी बार उच्च न्यायालय की खंडपीठ में चला गया। इसी अपील को भी उच्च न्यायालय ने खारीज कर  दिया। इस पर डीएवी संस्थान को मजबूर होकर स्थानीय अदालत में मुआवजा राशि जमा करवा दी है।
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