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बुधवार, नवंबर 14, 2018

सबसिडी का खेल निराला पशु ऋण केे नाम से सबसिडी का हो रहा घोटाला, पात्र को नहीं मिल रहा लाभ


डबवाली (सुखपाल )। केंद व प्रदेश सरकार द्वारा गरीब व जरूरतमंद लोगों के लिए अनेक योजनाएं चलाई जा रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना हो या लोगों को स्वालंबन के लिए ऋण योजना। गरीब व बेरोगारों को रोजगार के लिए अनेक मदों से ऋण योजनाएं बनाई गई हैं। इनमें से एक योजना है पशु पालन योजना यानि पशुओं के लिए सरकार द्वारा सबसिडी पर ऋण दिया जा रहा है। इसके लिए डबवाली उपमंडल के लोगों को पशु खरीदने के लिए ऋण योजना लागू की। लगभग चार माह पूर्व डबवाली के पशु अस्पताल में पशु खरीदने के इच्छुक लोगों के आवेदन मांगे गए। उपमंडल के सैंकड़ों लोगों ने इसके लिए आवेदन किया लेकिन इसमें भी बड़ा गड़बड़झाला हो रहा है।
सूत्रों के हवाले से एक खबर आ रही है  कि गरीब और बेरोजगार परिवारों को रोजगार देने के लिए डेयरी खुलवाने की योजना के दौरान पशु खरीदने के लिए दिए जाने वाले ऋण जिस पर सरकार भारी भरकम सबसिडी दे रही है उसका खुलकर खेल खेला जा रहा है। जिस योजना का फायदा गरीब परिवारों को मिलना चाहिए था, वह फायदा रसूखदार लोग जिनके पास आलीशान आवास तो हैं लेकिन पशुओं को रखने के लिए जगह तक नहीं है उन्हें पशु ऋण दिया जा रहा है और इसके तहत मिलने वाली सबसिडी को अपनी जेबों में भरने का काम कुछ लोग कर रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भैंसों की खरीद के नाम पर घोटाला विभिन्न मद्दों से मिलने वाली सबसिडी पर चोंच मारने का काम किया जा रहा है। नियमों के खिलाफ जाकर बहुत से ऐसे लोगों को ऋण मुहैया करवाया जा रहा है जो किसी भी तरह से इसके पात्र नही है। सूत्रों के माध्यम से यह भी पता चला है कि कुछ को तो आवेदन करने के बाद बिना किसी जांच-पड़ताल के कोरम पूरा कर ऋण स्वीकृत कर दिया गया।
बतां दे कि पशु पालन योजना के तहत पशु पालकों को भैंसे खरीदने के लिए लगभग दो लाख का दिया जाना तय किया जिसमें 50 प्रतिशत सबसिडी दिए जाने का प्रावधान है। इस 50 प्रतिशत का लाभ उठाने के लिए ऐसे-ऐसे हथकंडें अपनाए जा रहे हैं कि पात्र व्यक्ति दूर खड़ा सरकार द्वार बनाई गई योजनाओं को कोस रहा है। इस पर सरकार व विभागीय अधिकारियों को सोचने की आवश्यकता है। यही नहीं अनेक आवेदक तो ऐसे हैं जिन्हें ऋण स्वीकृति की सूचना मिलने के बाद बैंक अधिकारियों से सांठ-गांठकर सबसिडी की रकम को बाहर-बाहर डकारा जा रहा है।

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