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बुधवार, नवंबर 21, 2018

घपले घोटालों की अजब-गजब कहानी, डी-प्लान में लाखों के घोटाले का मामला,दो माह बाद भी नहीं हुई भ्रष्ट अधिकारियों से रिकवरी

डबवाली (सुखपाल )।
नगर परिषद डबवाली में डी-प्लान के तहत करवाए गए विकास कार्यों में हुए घोटाले की रिकवरी के आदेश दो माह बाद भी सिरे नहीं चढ़ पाए है। मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। यानि लूटने वालों को बचने की खुली छूट प्रदान कर दी गई है। जिला प्रशासन मूक दर्शक बना बैठा है। वर्णनीय है कि जिला उपायुक्त ने 11 सितंबर 2018 को डबवाली नगर परिषद के ईओ डबवाली को घोटाले की राशि वसूल न होने पर आरोपियों के खिलाफ 14 सितंबर तक आपराधिक मामला दर्ज करवाने के आदेश दिए थे। मगर उपायुक्त के आदेशों की आज तक पालना नहीं हुई। न तो गबन की गई राशि नगर परिषद के खजाने में जमा करवाई गई और न ही नगर परिषद के ईओ की ओर से पुलिस में मामला ही दर्ज करवाया गया।
उल्लेखनीय है कि डी-प्लान के तहत नगर परिषद डबवाली को विकास कार्यों के लिए राशि जारी की गई थी, जिसमें नगर परिषद के अधिकारियों ने जमकर घोटाला किया। डबवाली के व्हीस्ल ब्लोअर गोपाल मित्तल ने मामला उजागर किया और जुलाई-2015 में इसकी शिकायत की। मामले में आधा दर्जन से अधिकारियों के चेहरे बेनकाब हुए। लाखों के घोटाले में अधिकारियों की संलिप्तता की वजह से जांच को प्रभावित भी किया गया। भ्रष्टाचार की शिकायत पर कई दौर की जांच हुई। आखिरकार दो साल बाद 30 जून 2017 को एडीसी सिरसा ने अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें लाखों रुपये का घोटाला होना बताया। मामला डीसी सिरसा के पास पहुंचा। उपायुक्त प्रभजोत सिंह ने मामला स्थानीय निकाय विभाग को भेजा और मार्च-2018 में डायरेक्टर की ओर से आदेश आए। जिसमें आरोपियों से गबन की राशि रिकवर करने और उन्हें चार्जशीट करने के लिए कहा गया। उपायुक्त द्वारा ईओ डबवाली को निर्देश दिए गए। ईओ विजयपाल यादव ने इन आदेशों पर कुंडली मार ली। उपायुक्त कार्यालय की ओर से तीन बार रिमाइंडर भेजे गए। आखिरकार 11 सितंबर को उपायुक्त की ओर से तीन दिन की मोहलत देते हुए 14 सितंबर तक गबन की राशि जमा न करवाने पर एफआईआर दर्ज करवाने के आदेश दिए गए थे।
उपायुक्त के स्पष्ट आदेशों की दो माह से अधिक का समय बीत जाने पर भी पालना नहीं हुई है। डी-प्लान का लाखों रुपया डकारा जा चुका है। भ्रष्टाचार के आरोपी सरकारी ड्यूटी कर रहे है। न वे गबन की गई राशि जमा करवा रहे है और न ही उनके खिलाफ आपराधिक मामला ही दर्ज किया जा रहा है। ऐसे में भ्रष्टाचार पर कैसे अंकुश लग पाएगा?
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- इन अधिकारियों से की जानी है रिकवरी
क्रम अधिकारी का नाम व पद राशि
1.  महेंद्र सिंह जेई व फूल सिंह एमई 362607
2.  सुरेंद्र सिंह जेई व जयवीर डूडी एमई 576261
3.  सुरेंद्र सिंह जेई व जयवीर डूडी एमई 19343
4.  फूल सिंह एमई 53402
5.  सुरेंद्र सिंह जेई व जयवीर डूडी एमई 22280
6.  सुरेंद्र सिंह जेई 226905
7.  महेंद्र सिंह जेई 29034
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- इन अधिकारियों ने की जांच
डबवाली। विकास कार्यों में बरती गई धांधली की जांच का जिम्मा एडीसी कार्यालय के तकनीकी विशेषज्ञ राजाराम, पंचायतीराज विभाग के एसडीओ योगेंद्र कुमार, सहायक परियोजना अधिकारी सुनील जाखड़, पंचायतीराज विभाग के जेई वीर सिंह पर आधारित जांच कमेटी ने की थी। इसके अलावा डबवाली में सीवर लाइन के कार्य की जांच जनस्वास्थ्य विभाग मंडल-एक के कार्यकारी अभियंता से करवाई गई, जिसमें धांधली का खुलासा हुआ। जांच कत्र्ताओं द्वारा ही 12 लाख 89 हजार 832 रुपये के गबन किए जाने का आंकलन किया गया था।
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- लीगल नोटिस से बैकफुट पर आया प्रशासन
डबवाली। डी-प्लान की राशि में लाखों रुपये का गबन करने वालों द्वारा ‘चोरी और सीनाजोरी’ का प्रदर्शन किया गया। उपायुक्त की ओर से भ्रष्टाचार के आरोपियों से गबन की राशि रिकवर करने और राशि जमा न करवाने पर एफआइआर दर्ज करवाने के आदेश के बावजूद कार्रवाई थम गई। बताया जाता है कि भ्रष्टाचार के आरोपियों में से एक ने अधिकारियों को लीगल नोटिस भेज दिया। इस नोटिस के बाद जिला प्रशासन बैकफुट पर आ गया। यही वजह है कि भ्रष्टाचार के आरोपियों से दो माह का समय बीत जाने के बाद भी एक पैसा न तो रिकवर किया गया है और न ही उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला ही दर्ज किया गया है। भ्रष्टाचार के आरोपी आज भी विभिन्न स्थानों पर यथावत कार्य कर रर्हे हैं।

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