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रविवार, दिसंबर 09, 2018

यूं बनती-बिगड़ती रही हैं पार्टियां, तीन लाल ने ऐसे बनाए थे अलग-अलग दल

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सियासत में नए दल का बनना कोई नई बात नहीं है, लेकिन दल यदि किसी बड़ी पार्टी से टूटकर बने तो जरूर चर्चा का विषय बनता है। 9 दिसंबर के दिन हरियाणा के सबसे बड़े क्षेत्रीय राजनीतिक दल इंडियन नेशनल लोकदल से टूटकर अजय चौटाला अपने दोनों पुत्र दुष्यंत और दिग्विजय के साथ मिलकर नया दल बना रहे हैं। हालांकि इससे पहले भी यहां ऐसे मौके आए हैं, जब हरियाणा के तीन दिग्गजों ने कांग्रेस से अलग होकर नए राजनीतिक दल बनाए। जानिए- हरियाणा में बने बड़े राजनीतिक दलों का इतिहास, उन्हीं से जुड़े रहे लोगों से।


देवीलाल ने 1971 में छोड़ी थी कांग्रेस फिर लोकदल और इंडियन नेशनल लोकदल बनी
देवीलाल से जुड़े रहे हरियाणा के नेता संपत सिंह बताते हैं कि चौधरी देवीलाल ने 1971 में कांग्रेस छोड़ दी थी। 1974 में उन्होंने रोड़ी सीट से चुनाव लड़ा लेकिन 1975 में इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा कर दी, देवीलाल काफी दिन जेल में रहे। आपातकाल हटा तो 1977 में चुनाव हुए और देवीलाल ने जनता पार्टी से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में वे सीएम बने थे। इसके बाद 1980 में संसदीय चुनाव हुए, जिसमें देवीलाल ने जनता पार्टी (समाजवादी) से चुनाव लड़ा।
संपत सिंह बताते हैं कि इसके बाद देवीलाल ने 1982 में लोकदल की स्थापना की। 1987 का विधानसभा चुनाव भी लोकदल से लड़ा और बड़ी जीत हासिल की। देवीलील सीएम बने, इसके बाद 1989 में देवीलाल केंद्र की वीपी सिंह और चंद्रशेखर की सरकार में उपप्रधानमंत्री बन गए। मुख्यमंत्री का पद खाली हुआ तो ओमप्रकाश चौटाला को बैठा दिया गया। 1990 तक पार्टी में इस कदर विवाद हुआ कि लोकदल टूट गई। फिर 1996 में ओमप्रकाश चौटाला और देवीलाल ने इंडियन नेशनल लोकदल की स्थापना की जो अब पारिवारिक विवाद के बाद टूटने जा रही है। संपत सिंह मानते हैं कि क्षेत्रीय राजनीतिक दल रजवाड़ों की तरह होते हैं, यहां अहम का टकराव बहुत होता है। सत्ता हथियाने की लड़ाईयां आम होती है।

कांग्रेस से निकाले जाने पर बंसीलाल ने बनाई थी हरियाणा विकास पार्टी
हरियाणा के पूर्व सीएम बंसीलाल की सरकार में उनके मीडिया एडवाइजर रहे भाजपा नेता राजीव जैन बताते हैं कि हरियाणा विकास पार्टी बनाने से पहले बंसीलाल दो बार सीएम रह चुके थे। उस समय देश की प्रधानमंत्री रही इंदिरा गांधी और उनके बेटे संजय गांधी के साथ बंसीलाल के अच्छे संबंध थे। इंदिरा गांधी की मौत के बाद 1984 में राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने। राजीव गांधी के साथ हरियाणा के नेता चौधरी भजनलाल की नजदीकीयां थी।
पार्टी में दरकिनार होने की वजह से 1991 में बंसीलाल को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की वजह से कांग्रेस से निकाल दिया गया। 1996 में बंसीलाल ने हरियाणा विकास पार्टी की स्थापना कर दी। हरियाणा के विधानसभा चुनाव में 33 सीटें जीतकर बीजेपी के साथ गठबंधन कर लिया और सरकार बना ली। लेकिन 1999 में गठबंधन टूट गया और सरकार गिर गई। बंसीलाल का स्वास्थ्य खराब रहने लगा तो उन्होंने 8 साल के बाद 2004 में हरियाणा विकास पार्टी का वियल दोबारा कांग्रेस में कर दिया।

भजनलाल को सीएम नहीं बनाया तो कांग्रेस छोड़ बनाई थी हरियाणा जनहित कांग्रेस
चौधरी भजन लाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई के सहयोगी माने जाने वाले नेता धर्मपाल मलिक का कहना है कि चौधरी भजन लाल 1979, 1982, 1991 तीन बार हरियाणा के सीएम रहे। 2005 में कांग्रेस ने हरियाणा विधानसभा का चुनाव भजन लाल के चेहरे पर लड़ा था लेकिन जब मुख्यमंत्री बनाने की बात आई तो भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सीएम बना दिया गया। इस बात से भजनलाल काफी नाराज हुए और उन्होंने 2007 में कांग्रेस छोड़कर हरियाणा जनहित कांग्रेस पार्टी (हजकां) बनाई।

हजकां ने पहले बीएसपी से और फिर बीजेपी से गठबंधन किया लेकिन यह गठबंधन चल नहीं पाया। भजनलाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई के नेतृत्व में पार्टी ने खड़ा होने के लिए काफी संघर्ष किया लेकिन पार्टी खड़ी नहीं हो पाई। अंत में फैसला लिया गया कि पार्टी का विलय कर देना चाहिए। धर्मपाल मलिक बताते हैं कि पार्टी के कुछ लोगों ने तो बीजेपी में विलय करने का भी सुझाव रखा था लेकिन पार्टी नेताओं का मानना था कि वे कांग्रेसी हैं तो कांग्रेस में ही विलय करेंगे। अंत में 9 साल के संघर्ष के बाद 2016 में हरियाणा जनहित कांग्रेस का कांग्रेस पार्टी में विलय कर दिया गया। इस तरह हरियाणा में कई बार ऐसे मौके आए कि नए दल बने और बिगड़े।



source - Bhaskar group

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