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रविवार, दिसंबर 23, 2018

‘‘धीर वीर सन्यासी वो स्वामी श्रद्धानंद था...’’

अमर बलिदानी स्वामी श्रद्धानंद को समर्पित चार दिवसीय वार्षिक वेद प्रचार उत्सव श्रद्धा व उल्लास के साथ संपन्न
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डबवाली। 
आर्य समाज के प्रांगण में चल रहा चार दिवसीय वार्षिक वेद प्रचार उत्सव रविवार को अमर बलिदानी स्वामी श्रद्धानंद को श्रद्धासुमन अर्पित करके बड़ी श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया गया। सर्व प्रथम संस्था के प्रचार प्रमुख विजय कुमार शास्त्री के सानिध्य में हवन यज्ञ अनुष्ठान हुआ। जिसमें मुख्य यजमान के तौर पर शिवजी पटवारी-पूनम, अरुण जिंदल-अंजू व संजय खेत्रपाल-आईना ने सपरिवार आहुतियां डाली। तदोपरांत आर्य जगत की प्रसिद्ध भजनोपदेशिका व वैदिक प्रचारिका कु. अंजलि आर्या ने अपनी मधुर वाणी से आर्यजनों को स्वामी श्रद्धानंद के जीवन परिचय से अवगत करवाते हुए ‘‘धीर वीर सन्यासी वो स्वामी श्रद्धानंद था, आदि में श्रद्धा और अंत में आनंद था।’’
एक बार का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि बचपन में उनका नाम मुंशी राम था, उन दिनों ऋषि दयानंद उनके नगर में प्रचार-प्रसार करने पहुंचे। उनके पिता ने उन्हें ऋषि के प्रवचन सुनने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने अपने पिता को यह कह कर मना कर दिया कि मैं इतना पढ़ा-लिखा और वह सन्यासी। कुछ दिनों बाद एक दिन वह स्वयं ही ऋषि की सभा में चले गए। उन्होंने देखा कि अंग्रेज ऑफिसर उनकी बातों को बड़े ध्यान से सुन रहे हैं। उन्होंने उस समय ऋषि दयानंद सरस्वती से प्रश्न पूछे। ऋषि ने उन्हें निरूत्तर कर दिया। कु. अंजलि आर्य ने कहा कि जब एक नास्तिक मुंशी राम महर्षि दयानंद सरस्वती जी के प्रवचनों का इतना प्रभाव पड़ा कि वह स्वामी श्रद्धानंद बन गए। उन्होंने आह्वान किया कि यदि मुंशी राम अपने जीवन को सुधार सकते हैं तो आप भी हवन यज्ञ, गायत्री महामंत्र तथा ओ३म का जाप करके अपने जीवन को वेदों की राह पर ले जा सकते हैं। इस अवसर पर मुख्य यजमान परिवारों को स्मृति चिन्ह व स्वामी रचित सत्यार्थ प्रकाश भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त नियमित श्रोताओं को भी साहित्य देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में आर्य समाज कार्यकारिणी सदस्यों भारत मित्र छाबड़ा, विजय शास्त्री, कुलदीप पटवारी, सुदेश आर्य, राजन सुंधा, डॉ. रामफल आर्य, डॉ. जेएस हरचंद की ओर से कु. अंजलि आर्या व तबला वादक हरीश को सम्मानित किया गया। मंच संचालन अध्यक्ष एसके दुआ ने निभाया। शांतिपाठ के पश्चात् प्रसाद वितरित किया गया।

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