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गुरुवार, जनवरी 10, 2019

समाजसेवा के पुंज थे डा. मथरा दास चलाना

#dabwalinews 
डबवाली- ऐसे बहुत लोग हैं जो अपने परिवार के लिए जिये लेकिन ऐसे बहुत कम लोग हुए जो अपने-पराए की सोच से ऊपर उठकर दूसरों को भी अपना परिवार की तरह मान कर जिए। ऐसे ही शख्सियत थे समाजसेवी डा. मथरा दास चलाना, जिन्होंने अपना जीवन निस्वार्थ भाव से बिना किसी छल कपट के जीया और ताउम्र मानवता की सेवा को ही सर्वोपरि माना। गरीब व असहाय लोगों की सहायता में हर पल जिया और जिंदगी को अलविदा कहने से कुछ घंटे पहले तक अपने सेवा ध्येय से उसका ध्यान नहीं हटा।
डा. मथरा दास चलाना का जन्म 17 नवंबर 1950 को श्री जगराज राय व माता श्री मति विद्या देवी के घर पर गांव पन्नीवाला रुल्दु में हुआ। गांव पन्नीवाला व मांगेआना के सरकारी स्कूलों में प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की और बाद में गुरू नानक कॉलेज डबवाली में भी पढ़ाई की। इसके उपरांत अपने गांव पन्नीवाला रुल्दु में ही प्रेक्टिस करते हुए ग्रामीणों को उनके घर द्वार तक ही प्राथमिक चिकित्सा सेवाओं का लाभ दिया। वहीं,1979 में मुक्तसर निवासी वनीता चलाना से उनका विवाह हुआ। उनके घर पुत्र नवदीप उर्फ चीनू, पुत्रियों स्वाति व रिची ने जन्म लिया। नवदीप चलाना अब फूड़ सप्लाई इंस्पेक्टर के तौर पर बठिंडा में कार्यरत हैं। रिची की शादी असीम चावला से हुई है। उनकी दूसरी पुत्री स्वाति की 1995 में हुए अग्रिकांड में मृत्यु हो गई थी। अचानक बेटी की मृत्यु से डा. मथरा दास चलाना व उनके परिवार को गहरा आघात लगा। इस दौरान ही डा. चलाना समाजसेवा की ओर अग्रसर हुए। वह डबवाली की प्रमुख सामाजिक संस्था वरच्युस क्लब के साथ जुड़ गए और मेगा पल्स पोलियो कैंप, कला संस्कृति, स्वास्थ्य शिविर, ट्रैफिक जागरूक्ता अभियान व अन्य समाजसेवी प्रकल्पों में सक्रियता से भाग लिया। उनके बेहतरीन कार्यशैली व लग्न को देखते हुए उन्हें दो बार वरच्युस क्लब का प्रधान भी चुना गया। साल 2015 में जब सामाजिक संस्था 'अपनेÓ का गठन हुआ तो उन्हें इस संस्था का प्रधान चुना गया। उनके नेतृत्व में संस्था ने अनेक सामाजिक प्रकल्प लगाए व जरूरतमंदों की सहायता के लिए स्थापित 'नेकी दा घरÓ नामक प्रोजेक्ट को लेकर अपने एनजीओ के अन्य सदस्यों के साथ डा. चलाना को खूब सराहना मिली। उन्होंने अपने एनजीओ के माध्यम से रक्तदान क्षेत्र में भी कार्य करते हुए लोगों को जागरूक करने में अहम भूमिका निभाई। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ व नशा मुक्ति अभियान में प्रशासन का भी सहयोग किया। इसके अलावा शहर की कई अन्य संस्थाओं के साथ भी सहयोग करते हुए सेवा प्रकल्पों में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।
गत 5 जनवरी की रात्रि को वह अपने संस्था के सदस्यों के साथ शहर के विभिन्न क्षेत्रों में गए और जहां भी कोई शख्स जरूरतमंद सर्दी से ठिठुरता हुआ मिला उसे गर्म कंबल व अन्य कपड़े प्रदान किए। बाद में वह सदस्यों को यह कार्य जारी रखने का निर्देश देते हुए खुद किसी कार्यवश घर लौट आए। रात्रि करीब 11 बजे तक भी वह सदस्यों के साथ संपर्क में रहे। इसके बाद सो गए लेकिन उठने से पहले ही 6 जनवरी रविवार की सुबह करीब 4 बजे ही अचानक हृदय गति रूकने से उनका देहांत हो गया। इस प्रकार एक सच्चा समाजसेवी हमसे दूर चला गया। उनके देहांत की खबर फैलते ही पूरे शहर में शोक की लहर दौड़ गई व उनको जानने वाले हर शख्स के चेहरे पर उदासी छा गई। डा. मथरा दास चलाना तो चले गए लेकिन वह समाजसेवा क्षेत्र में किए अपने उल्लेखनीय कार्यों के कारण डबवालीवासियों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे। शहर की सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने डा. मथरादास चलाना द्वारा चलाए गए सामाजिक प्रकल्पों को जारी रखने का संकल्प लिया है।

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