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शनिवार, फ़रवरी 23, 2019

मिलेनियम स्कूल डबवाली ने सैनिकों के परिवार के बच्चों की शिक्षा का जिम्मा लेते हुए दाखिला फीस बिल्कुल फ्री-डॉ दीप्ति शर्मा

डबवाली न्यूज़ 
मिलेनियम स्कूल डबवाली की मैनेजमेंट कमेटी ने सैनिकों के परिवार के बच्चों की शिक्षा का जिम्मा लेते हुए दाखिला फीस बिल्कुल फ्री कर दी है स्कूल के अध्यक्ष डॉ दीप्ति शर्मा ने कहा सैनिक हमारे देश का गौरव है वह हमारी रक्षा के लिए अपना पूरा जीवन लगा देते हैं हमारा फर्ज है उनके बच्चों का विशेष ध्यान रखा जाए मिलेनियम स्कूल में इस दिशा में सोचते हुए एक सहारनीय कदम उठाया है उन्होंने कहा भारतीय सेना पर हर भारतीय को गर्व है और हो भी क्यों न, यह भारतीय सेना ही जो भारत को हमेशा दुश्मनों से दूर रखती है| भारतीय सैनिक अपनी जान पर खेल कर हमारे वतन को सुरक्षित और स्वतन्त्र बनाये रखते है| उनकी वीरता और कर्त्तव्य-भावना के लिए पूरा देश उन्हें सम्मान की नज़रों से देखता है| वैसे तो हम में से लगभग सभी को उनके योगदान और उनकी उपलब्धियों के बारे में कुछ न कुछ तो पता ही है| परन्तु यहाँ हम जिन बातों का जिक्र करने जा रहे हैं, उससे आपका भारतीय सेना के प्रति सम्मान और बढ़ जाएगा| दुश्‍मनों के छक्‍के छुड़ा देना और युद्ध में निर्भिकतापूर्वक डटे रहना, यहां तक कि जब विपरीत परिस्थितियों में भी युद्ध या लड़ाई की जा रही हो, तब भी वीरता से मैदान में डटे रहते है भारतीय सेना, जाति, पंथ या धर्म के नाम पर भेदभाव नहीं करती है। सेना का सैनिक, सर्वप्रथम राष्‍ट्र का सैनिक होता है उसके बाद वह कुछ और होता है। यह एक अनूठी विशेषता है जो विविधताओं को एक टीम में बांध देती है। सैनिक के लिए अपनी जीविका के लिए सेना में जाना मजबूरी रहती हो किन्तु किसी सैनिक की शहादत के बाद भी उसकी संतानों के द्वारा उस पर गर्व करना, सैनिक बनकर देश की रक्षा करने का संकल्प लेना, उस अमर शहीद के परिजनों द्वारा तिरंगे पर बलिदान होते रहने की कसम उठाना तो मजबूरी नहीं हो सकती? बहरहाल, देर तो अभी भी नहीं हुई है. हम सभी को एकसाथ जागना होगा, निरंतर जागे रहना होगा. न सही प्रतिदिन तो माह में किसी एक दिन समस्त सैनिकों को पूरे सम्मान के साथ याद तो कर ही सकते हैं. न सही उनके लिए कोई भव्य आयोजन मगर अपने बच्चों को अपने सैनिकों की वीरता के बारे में तो बता ही सकते हैं. न सही किसी राजनीति का समर्थन किन्तु सैनिकों के अपमान में बोले जाने वाले वचनों का पुरजोर विरोध तो कर ही सकते हैं.
समाज किसी भी दशा में जाए, राजनीति अपनी करवट किसी भी तरफ ले, तुष्टिकरण की नीति क्या हो, यह अलग बात है मगर सच यह है कि ये सैनिक हैं, इसलिए हम हैं; सच यह है कि सैनिकों की ऊँगली ट्रिगर पर होती है, तभी हम खुली हवा में साँस ले रहे हैं; सच यह है कि वह हजारों फीट ऊपर ठण्ड में अपनी हड्डियाँ गलाता है, तभी हम बुद्धिजीवी होने का दंभ पाल पाते हैं; सच यह है कि वह सैनिक अपनी जान को दाँव पर लगाये बैठा होता है, तभी हम पूरी तरह जीवन का आनन्द उठा पाते हैं; सच यह है कि एक सैनिक अपने परिवार से दूर तन्मयता से अपना कर्तव्य निभाता है, तभी हम अपने परिवार के साथ खुशियाँ बाँट पाते हैं.
देखा जाये तो अंतिम सच यही है; कठोर सच यही है; आँसू लाने वाला सच यही है; तिरंगे पर मर मिटने वाला सच यही है; परिवार में एक शहादत के बाद भी उनकी संतानों सैनिक बनाने वाला सच यही है. कम से कम हम नागरिक तो इस सच को विस्मृत न होने दें; कम से कम हम नागरिक तो सैनिकों के सम्मान को कम न होने दें; कम से कम हम नागरिक तो उनकी शहादत पर राजनीति न होने दें; कम से कम हम नागरिक तो उन सैनिकों को गुमनामी में न खोने दें. आइये संकल्पित हों, अपने देश के लिए, अपने तिरंगे के लिए और उससे भी आगे आकर अपने जाँबाज़ सैनिकों के लिए.मिलेनियम स्कूल हमेशा आर्मी के साथ है और उनके बच्चों की शिक्षा का जिम्मा अपने पे लेकर निरंतर आगे बढ़ता रहेगा अच्छी शिक्षा देने में मिलेनियम सबसे आगे रहेगा

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