BREAKING NEWS

Post Top Ad

Your Ad Spot
�� Dabwali न्यूज़ है आपका अपना, और आप ही हैं इसके पत्रकार अपने आस पास के क्षेत्र की गतिविधियों की �� वीडियो, ✒️ न्यूज़ या अपना विज्ञापन ईमेल करें dblnews07@gmail.com पर अथवा सम्पर्क करें मोबाइल नम्बर �� 9354500786 पर

शुक्रवार, मार्च 29, 2019

लड़की का पिता बोला-शगुन में दूंगा बस एक नारियल, लड़के ने मांगी ऐसी चीज कि भर आईं आंखें

 शादियों में महंगे तोहफे और दहेज देने व लेने का प्रचलन आधुनिक समाज में भी जारी है। आज कल कुछ ऐसे किस्‍से भी सामने आ रहे हैं जहां बिना दहेज के शादी की जाती है। मगर हिसार जिले के छोटे से गांव खरकड़ी में एक अनोखी शादी होने का मामला सामने आया है। शादी ऐसी की जो लोगों के सामने मिसाल बन गई। दूल्हे पक्ष ने दहेज जैसी कुप्रथा पर तमाचा जड़ा है।


यहां लड़की और लड़के दोनों ही दहेज लेने देने के पक्ष में नहीं थे। जब खरकड़ी निवासी लड़की का पिता राजाराम लड़के को देखने गया तो लड़के को कहा कि मैं दहेज नहीं दूंगा। बस एक नारियल शगुन के तौर पर दे सकता हूं। तब लड़के ने कहा मुझे नारियल भी नहीं चाहिए कुछ देना चाहते हैं तो फल फूलों वाले पौधें देना वही सब से अच्छा गिफ़्ट होगा। यह सुनकर लड़की की पिता की आंखे भर आईं और कहा कि मुझे तुम पर गर्व है।

बस इसी दौरान डोभी निवासी जयसिंह के पुत्र सुरेंद्र कुमार और खरकड़ी निवासी राजाराम मतवा की पुत्री मनीष की दहेज कुप्रथा को खत्म करने की सोच मिल गई। इसके बाद विवाह समारोह में आए लोगों ने नवयुगल को विदाई में पौधे भेंट करते हुए हरियाली के लिए इनकी सुरक्षा का भी संकल्प लिया।

पौधरोपण करने की रखी शर्त


दूल्‍हे ने लड़की वालों के सामने सिर्फ एक शर्त रखी कि सभी को मिल कर पौधे लगाने होंगे। दूल्हे ने बताया कि दहेज लेना अपराध है। एक औरत अपने साथ खुशियां लेकर आती है तो पैसे क्यों लें। शादी या कोई भी सामाजिक समारोह एक अच्छा अवसर है, जब पर्यावरण संरक्षण को लेकर पौधे लगाने जैसे काम कर समाज को एक संदेश दिया जाए। दुल्हन ने भी कहा कि ऐसा जीवनसाथी पाकर वह काफी खुश है। दुल्हन के परिजन बोले पैसे के कारण दुल्हन को मारने वाले इससे सबक लें। बता दें कि लड़का एक निजी कंपनी में काम करता है।

लड़की के पिता ने कहा कि दहेज लिए बिना विवाह करने की थी इच्छा

दूल्हे बने सुरेंद्र कुमार ने बताया कि विवाह में खुशियों को लेकर इस तरह का कदम उठाया। परिवार की इच्छा थी कि दहेज लिए बिना विवाह करना है, इसके लिए उसने सहर्ष इस निर्णय का स्वागत किया, लेकिन उसकी भी मंशा थी कि दहेज की कुप्रथा समाप्त करने के साथ हरियाली का भी संदेश दिया जाए। यह संदेश घर में लक्ष्मी के रूप में पैर रखने वाली अर्धांगिनी व आए सभी लोगों को विदाई में पौधे गिफ्ट का था।

कोई टिप्पणी नहीं:

Post Top Ad

पेज