सरकार कानून तो बनाती है लकिन इन बच्चों के लालन पालन के लिए कोई ठोस योजना नहीं बना  पाती


बचपन, इंसान की जिंदगी का सबसे हसीन पल, न किसी बात की चिंता और न ही कोई जिम्मेदारी। बस हर समय अपनी मस्तियों में खोए रहना, खेलना-कूदना और पढऩा। लेकिन सभी का बचपन ऐसा हो यह जरूरी नहीं। बाल मजदूरी की समस्या से हर कोई वाकिफ है। कोई भी ऐसा बच्चा जिसकी उम्र 14 वर्ष से कम हो और वह जीविका के लिए काम करे बाल मजदूर कहलाता है। गरीबी, लाचारी और माता-पिता की प्रताडऩा के चलते ये बच्चे बाल मजदूरी के इस दलदल में धंसते चले जाते हैं। बच्चों का समय स्कूल में कॉपी-किताबों और दोस्तों के बीच नहीं बल्कि होटलों, घरों, उद्योगों में बर्तनों, झाड़ू-पोंछे और औजारों के बीच बीतता है।
पिछले कुछ दिनों से डबवाली व पंजाब के किलियांवाली में  यह स्थिति अत्याधिक भयावह हो चली है। हर गली की नुक्कड़  कई राजू-मुन्नी-छोटू-चवन्नी मिल जाएंगे तो वहीं अनेक बच्चे दुकान-दुकान घर-घर जाकर सामान बेचते भी दिखाई पड़ जाएंगे जो हालातों के चलते बाल मजदूरी की गिरफ्त में आ चुके हैं। यह बात सिर्फ बाल मजदूरी तक ही सीमित नहीं है इसके साथ ही बच्चों को कई घिनौने कुकृत्यों का भी सामना करना पड़ता है। जिनका बच्चों के मासूम मन पर बड़ा गहरा प्रभाव पड़ता है। 

बाल मजदूर की इस स्थिति में सुधार के लिए सरकार ने 1986 में चाइल्ड लेबर एक्ट बनाया जिसके तहत बाल मजदूरी को एक अपराध माना गया तथा रोजगार पाने की न्यूनतम आयु 14 वर्ष कर दी। इसी के साथ सरकार नेशनल चाइल्ड लेबर प्रोजेक्ट के रूप में बाल मजदूरी को जड़ से खत्म करने के लिए कदम बढ़ा चुकी है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य बच्चों को इस संकट से बचाना है। जनवरी 2005 में नेशनल चाइल्ड लेबर प्रोजेक्ट स्कीम को 21 विभिन्न भारतीय प्रदेशों के 250 जिलों तक बढ़ाया गया। 
आज सरकार ने आठवीं तक की शिक्षा को अनिवार्य और नि:शुल्क कर दिया है, लेकिन लोगों की गरीबी और बेबसी के आगे यह योजना भी निष्फल साबित होती दिखाई दे रही है। बच्चों के माता-पिता सिर्फ इस वजह से उन्हें स्कूल नहीं भेजते क्योंकि उनके स्कूल जाने से परिवार की आमदनी कम हो जाएगी। बाल मजदूरों की इतनी अधिक संख्या होने का मुख्य कारण सिर्फ और सिर्फ गरीबी है।। यहां एक तरफ तो ऐसे बच्चों का समूह है बड़े-बड़े मंहगे होटलों में 56 भोग का आनंद उठाता है और दूसरी तरफ ऐसे बच्चों का समूह है जो गरीब हैं, अनाथ हैं, जिन्हें पेटभर खाना भी नसीब नहीं होता। दूसरों की जूठनों के सहारे वे अपना जीवनयापन करते हैं। 


जब यही बच्चे दो वक्त की रोटी कमाना चाहते हैं तब इन्हें बाल मजदूर का हवाला देकर कई जगह काम ही नहीं दिया जाता। आखिर ये बच्चे क्या करें, कहां जाएं ताकि इनकी समस्या का समाधान हो सके। सरकार ने बाल मजदूरी के खिलाफ कानून तो बना दिए। इसे एक अपराध भी घोषित कर दिया लेकिन क्या इन बच्चों की कभी गंभीरता से सुध ली? बाल मजदूरी को जड़ से खत्म करने के लिए जरूरी है गरीबी को खत्म करना। इन बच्चों के लिए दो वक्त का खाना मुहैया कराना। इसके लिए सरकार को कुछ ठोस कदम उठाने होंगे। सिर्फ सरकार ही नहीं आम जनता की भी इसमें सहभागिता जरूरी है। हर एक व्यक्ति जो आर्थिक रूप से सक्षम हो अगर ऐसे एक बच्चे की भी जिम्मेदारी लेने लगे तो सारा परिदृश्य ही बदल जाएगा। क्या आपको नहीं लगता कि कोमल बचपन को इस तरह गर्त में जाने से आप रोक सकते हैं? देश के सुरक्षित भविष्य के लिए वक्त आ गया है कि आपको यह जिम्मेदारी अब लेनी ही होगी। क्या आप लेंगे ऐसे किसी एक मासूम की जिम्मेदारी?
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बाल श्रम समस्या ऐसे हो सकती है समाप्त

भारत सरकार ने बाल श्रम पर प्रतिबंध लगाया हुआ है, इसलिए यह गैरकानूनी भी है. लेकिन सरकार और व्यवस्था की अपनी सीमाएं और खामियां हैं. देश-दुनिया के तमाम संगठन भी बाल मजदूरी को समाप्त करने के लिए अपने-अपने स्तर पर अभियान चला रहे हैं. लेकिन आम लोगों की जागरूकता और सहयोग से ही बाल श्रम की समस्या को खत्म किया जा सकता है. इसलिए अब आप जब भी ढाबे या किसी के घर पर बाल मजदूर को देखें, तो गरीबी के तर्क के आधार पर भावनाओं में बहने की बजाए इसका पुरजोर विरोध करें. ऐसी जगहों से कोई भी सामान मत खरीदिए।अगर किसी के घर में घरेलू नौकर बच्चा है, तो उसका सामाजिक बहिष्कार कीजिए। बच्चों का बचपन सुरक्षित बनाने के लिए एक अभियान चलाया हुआ है. ऐसे अभियानों से जुडक़र भी आप देश के बच्चों का बचपन सुरक्षित बनाने में मदद कर सकते हैं। आपके बाल श्रम के विरोध से न केवल बेरोजगारों को काम मिलेगा, बल्कि गुलामी में जी रहे बच्चों का बचपन भी आजाद हो सकेगा. भारत में शिक्षा का अधिकार कानून लागू है, जिसके तहत 14 साल तक के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान है. ऐसे में देश की यह भावी पीढ़ी मजदूरी करने की बजाए स्कूल जाएगी. जाहिर है वे पढ़-लिखकर एक बेहतर नागरिक बनेंगे और देश की तरक्की में अपना योगदान देंगे।CreditDabwali darpan