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रविवार, मार्च 24, 2019

क्षय रोग एक संक्रामक बीमारी है जिससे प्रतिवर्ष अनेक लोग मौत का शिकार होते हैं - डॉ दीप्ति शर्मा

डबवाली न्यूज़ 
गोल्डन एरा मिलेनियम स्कूल डबवाली NH-9 मलोट रोड पर स्थित में रविवार को World Tuberculosis day (विश्व क्षय रोग दिवस) पर एक वर्कशॉप का आयोजन किया गया यह दिवस प्रत्येक वर्ष 24 मार्च को मनाया जाता है गोल्डन एरा मिलेनियम स्कूल ने इस विश्व क्षय रोग दिवस को मनाया स्कूल अध्यक्ष डॉ दीप्ति शर्मा  ने समूह स्टाफ को इस दिवस के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि क्षय रोग एक संक्रामक बीमारी है जिससे प्रतिवर्ष अनेक लोग मौत का शिकार होते हैं इसके प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा हर साल 24 मार्च को विश्व क्षय रोग दिवस के रूप में मनाया जाता है उन्होंने आगे बताया कि क्षय रोग छूत का रोग है और इसे प्रारंभिक अवस्था में न रोका गया तो जानलेवा साबित होता है यह रोग एक बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण होता है इसी फेफड़ों का रोग माना जाता है टीबी के बैक्टीरिया सांस द्वारा शरीर में प्रवेश करते हैं इससे रोग से प्रभावित अंको में छोटी छोटी गांठ बन जाती है उपचार न होने पर धीरे-धीरे प्रभावित अंग अपना कार्य करना बंद कर देते हैं और यही मृत्यु का कारण हो सकता है उन्होंने कहा कि विश्व क्षय रोग दिवस बनाने का मकसद लोगों को इस गंभीर बीमारी से होने वाले परिणामों के प्रति जागरूक करना है इस दिन जगह-जगह संगोष्ठी का आयोजन किया जाता है उन्होंने कहा कि विश्व टीबी दिवस 1882 में उस तारीख को याद करता है जब डॉक्टर रॉबर्ट कोच ने मापकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस की खोज की घोषणा की जो बैक्टीरिया टीबी का कारण बनता है इस वर्ष के विश्व टीबी दिवस की थीम लीव नो वन बिहाइंड टीबी उन्मूलन के लिए नए सिरे से प्रतिबद्धता और अव्यक्त टीबी संक्रमण के परीक्षण और उपचार के विस्तार की समय पर आवश्यकता पर प्रकाश डालती है उन्होंने कहा कि रोकने योग्य और इलाज योग्य होने के बावजूद टीबी अब दुनिया का प्रमुख संक्रामक रोग हत्यारा है टीबी की बीमारी के इलाज और नियंत्रण की हमारी क्षमता पर दवा प्रतिरोध का खतरा बना रहता है उन्होंने अंत में कहा कि टीबी लाइलाज नहीं है लेकिन दवाओं को पूरे वक्त तक लेना चाहिए बीच में ही दवा छोड़ देने से टीबी का इलाज पूरी तरह से नहीं हो पाता दुनिया भर में करीब 1700000 लोगों की मौत टीबी की वजह से ही हो जाती है टीबी का इलाज अगर गंभीरता पूर्वक करवाया जाए और इस बारे में जागरूक बने तो टीबी के खतरे से बचा जा सकता है

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