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बुधवार, अप्रैल 10, 2019

982 स्कूल करेगी बंद करेगी सरकार ,गरीब बच्चों को मुफ्त दाखिला नहीं देंगे Private school

डबवाली न्यूज़ 
हरियाणा के Private schools ने इस साल किसी भी गरीब बच्चे को मुफ्त में दाखिला नहीं देने का फैसला किया है। चार साल से मुफ्त दाखिले देते आ रहे इन स्कूलों को सरकार की तरफ से एक भी रुपया उपलब्ध नहीं कराया गया है। सरकार के इस रुख से नाराज होकर Private schools ने इस बार पहले सरकारी मदद उपलब्ध कराने और उसके बाद ही स्कूलों में गरीब बच्चों के दाखिले करने का निर्णय लिया है। दूसरी तरफ सरकार ने 982 ऐसे स्कूलों को बंद करने का निर्णय लिया है, जिन्होंने मान्यता के लिए शिक्षा विभाग के पास आवेदन नहीं किया है। इन स्कूलों में एक लाख 12 हजार से अधिक बच्चे पढ़ते हैैं।

फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन एवं नेशनल इंडिपेंडेट स्कूल एलाइंस (निसा) के अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने मंगलवार को चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार खुद नहीं चाहती कि गरीबों को उनका हक मिले। राज्य में जब से भाजपा की सरकार बनी है, तब से गरीब बच्चों को पढ़ाने की एवज में दी जाने वाली रिइंबर्समेंट की राशि नहीं दी गई है।

कुलभूषण शर्मा ने कहा कि सरकार गरीब बच्चों के अभिभावकों के जनधन खातों में सीधा कैश जमा कराए, ताकि बच्चे हक के साथ अपने स्कूल का चुनाव कर सकें। सरकार गरीब बच्चों को मुफ्त पढ़ाने की वाहवाही लूटना चाहती है, मगर एक रुपया भी खर्च नहीं करना चाहती। Private schools पर पडऩे वाले खर्च को स्कूल के अन्य बच्चों के अभिभावकों पर डालने की मजूबरी स्वीकार नहीं की जा सकती।

कुलभूषण शर्मा के अनुसार राज्य के Private schools में करीब एक लाख गरीब बच्चे पढ़ते हैैं। दिल्ली सरकार Private schools को 1700 रुपये प्रति माह रिइंबर्समेंट देती है। हरियाणा सरकार पर Private school's की यह राशि अब तक करीब 500 करोड़ रुपये बनती है। उन्होंने कहा कि सरकार 2003 से पहले चल रहे अस्थायी मान्यता व अनुमति प्राप्त स्कूलों को बना शर्त मान्यता दे।

दूसरी तरफ दो जमा पांच मुद्दे जन आंदोलन के संयोजक सत्यवीर हुड्डा ने कहा कि Private schools की ऐसी किसी भी कोशिश का पुरजोर विरोध होगा। राज्य सरकार को इन स्कूलों की मनमानी के दबाव में आने की जरूरत नहीं है।

शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास ने Private schools को बंद करने की खबरों को भ्रामक और आधारहीन बताया है। दास के अनुसार केवल उन्हीं गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों पर कार्रवाई होगी, जिन्होंने मान्यता के लिए आवेदन ही नहीं किया है। ऐसे स्कूलों की संख्या 982 हैं। इनमें पढऩे वाले छात्रों का सरकारी स्कूलों में दाखिले के साथ-साथ किताबों और दूसरी आवश्यक चीजों का प्रबंध कर लिया गया है। इन 982 स्कूलों में कुल एक लाख 12 हजार 137 बच्चे पढ़ते हैैं।



credit jagran network 

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