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गुरुवार, फ़रवरी 21, 2013

डेरा सच्चा सौदा की सफाई का सच, उठे सवाल

सिरसा, 21 फरवरी (अंशुल छत्रपति)। साध्वियों से  यौन शोषण एवं कई हत्याओं के मामलों में अदालतों के चक्कर काट रहे डेरा मुखी नए विवाद में फंसते नजर आ रहे हैं।  इस बार उनका सफाई अभियान कानूनी सवालों के घेरे में आ गया है। बढ़चढ़कर कभी हरिद्वार तो कभी रोहतक सहित कई शहरों में सफाई अभियान चला चुके डेरा के खिलाफ एक याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने चंडीगढ़ नगर निगम  से रिकॉर्ड तलब किया है। उच्च न्यायालय ने मामले में आगामी कार्रवाई हेतु 27 फरवरी की तारीख तय की है।
          मिली जानकारी के अनुसार लॉयर्स फॉर ह्यूमन राइट्स संस्था की ओर से पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर डेरा के चंडीगढ़ और पंचकुला में प्रस्तावित सफाई अभियान पर आपत्ति जताई गई है। याचिका में कहा गया है कि डेरा सच्चा सौदा प्रमुख संगीन आपराधिक मामलों में संलिप्त है। उसके निर्देश पर डेरा सच्चा सौदा द्वारा सफाई अभियान चलाना संदेहजनक है। इस बात की तीखी आलोचना करते हुए याचिका में कहा गया है कि एक आदमी कानूनी घेरे में फंसा हुआ है और वो जानबूझकर इस प्रकार के अभियान चला रहा है ताकि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सके। याचिका को स्वीकार करते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में आज इस पर मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई भी की। इस सिलसिले में चंडीगढ़ नगर निगम से रिकॉर्ड तलब किया गया है। रिकॉर्ड में यह देखा जाएगा कि क्या डेरा सच्चा सौदा ने सफाई अभियान के लिए अनुमति ली है। अगर  अनुमति ली है तो किस आधार पर उन्हें अनुमति मिली है। मालूम हो कि सफाई अभियानों के क्रम में चंडीगढ़ और पंचकुला में भी डेरा का सफाई अभियान प्रस्तावित है। ऐसे में मामला न्यायालय में आने के बाद डेरा का यह अभियान भी संदेह के घेरे में आ गया है।
सफाई का सच
              भारी भरकम भीड़ दिखाकर पेशी भुगतने वाला डेरा मुखी सफाई अभियान की आड़ में अपने अंध भक्तों की प्रदर्शनी लगाता घूमता रहा है। खुद की चादर इतनी दागदार है कि किसी भी बेहतरीन कंपनी के डिटर्जेंट पाउडर से धुल नहीं पाएगी। शहरों की सफाई करते-करते डेरा मुखी हरिद्वार पहुंच गए। वहां भी उन्होंने हरिद्वार में सफाई अभियान चलाया। पाप धोने वाली गंगा में उतरे डेरा मुखी के पाप गंगा भी नहीं धो पाई। क्योंकि जब से हरिद्वार गए हैं उसके बाद नए-नए मामलों में फंसते जा रहे हैं। आखिर बलात्कार, हत्याओं और अंडकोशों को निकालकर किसी व्यक्ति को नपुंसक बना देने  जैसे पाप किसी के सर पर चढ़े हों तो गंगा में डुबकी मारने से भी क्या होगा? फिर भी बेशर्मी से अंध भक्तों के साथ झाड़ू उठाए फोटो खिंचवाते डेरा मुखी का सफाई अभियान तो अपने-आप में ही मैला है। देखना यह है कि कानून के घेरे में आए इस सफाई अभियान का सच क्या निकलकर आता है। याचिकादाता ने सवाल उठाकर जग जाहिर तो कर दिया है कि सबकुछ ठीक नहीं है। डेरे पर अंगुली उठाकर यह तो बता ही दिया कि भीड़ दिखाकर मामलों में सजा से बचने की डेरा मुखी कोशिश पर कोशिश किए जा रहा है।


1 टिप्पणी:

ਰਮੇਸ਼ ਸੇਠੀ ਦੀ ਕਲਮ ਤੋ............ ने कहा…

ਜਦੋ ਹਾਥੀ ਆਪਣੀ ਮਸਤ ਚਾਲ ਚਲਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਕੁੱਤੇ ਭੋਕਦੇ ਹੀ ਹਨ

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