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शुक्रवार, सितंबर 18, 2015

डेरों में शुरू हुई सियासत पहुंचने लगे भावी जनप्रतिनिधि

Dabwalinews.com
डबवाली।
 पंचायती चुनावों में डेरों की सियासत शुरू हो गई है। नामांकन के दौर में ही भावी जनप्रतिनिधियों ने डेरों में मत्था टेकना शुरू कर दिया है। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। पिछली दफा एक गांव में बने डेरे में 10 लाख रुपये में बोली छूटी थी। सर्वाधिक बोलीदाता के सिर सरपंची का ताज सजा था।
हरियाणा के अंतिम छोर पर बसा डबवाली पंजाब तथा राजस्थान से सटा हुआ है। त्रिवेणी क्षेत्र में बने डेरे धार्मिक आस्था का केंद्र बने हुए हैं। राजनीतिज्ञ धार्मिकता की आड़ में इन डेरों के जरिये अपनी गोटियां फिट करते हैं। चौथे पंचायती चुनाव के दौरान पंजाब सीमा से सटे एक गांव में स्थित एक डेरा में सरपंच पद के उम्मीदवार के लिए बोली तक लग गई थी। चौधरी बनने के लिए एक व्यक्ति ने दस लाख रुपये डेरा को दिए थे। आस्था का यह स्थल सियासत के केंद्र में बदल गया। डेरा प्रमुख की मुहर लगते ही 10 लाख रुपये देने वाले को सरपंची मिल गई। इस बार भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। फिलहाल नामांकन प्रक्रिया चल रही है। इस बीच ही चौधरी डेरों की ओर रूख कर रहे हैं। ग्रामीण आंचल में बने डेरों में भी राजनीतिक चर्चाओं से सियासत गर्मा गई है। भावी जन प्रतिनिधि डेरा प्रमुख से आशीर्वाद लेने के लिए उत्सुक दिख रहे हैं। बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट ने साक्षरता वाली शर्त पर रोक लगा दी, जिससे अनपढ़ उम्मीदवारों के साथ-साथ डेरों की भी लॉटरी निकल गई। हालांकि ऐसे मामलों को पकड़ने के लिए प्रशासन अलर्ट है।
यह है स्थिति
खंड डबवाली में करीब-करीब प्रत्येक गांव में डेरा या अन्य धार्मिक स्थल हैं। यहां आस्था का सैलाब बहता है। चुनाव के समय यहां राजनीतिक आशीर्वाद के बहाने श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचने के लिए नजर आते हैं। इस बार भी ऐसा हो रहा है।
पिछली बार 10 लाख रुपये तक पहुंची थी बोली
इस बार भी कई धनाढ्य परिवार हुए एक्टिव
हम ऐसे मामलों पर नजर रख रहे हैं। अगर कोई उम्मीदवार प्रलोभन देता है, तो वह गलत है। सबूत मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-सुरेश कस्वां, एसडीएम, डबवाली

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