पशुओं की लंपी स्किन बीमारी पर विधानसभा में अमित सिहाग ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव ला सरकार को जगाने का किया प्रयास
Dabwalinews
जिला सिरसा में पशुओं में फैल रही लंपी स्किन बीमारी को देखते हुए हलका डबवाली के विधायक अमित सिहाग ने विधानसभा में इस विषय पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव ला सरकार को जगाने का प्रयास किया है।सिहाग ने कहा कि यह बीमारी तेजी से फैल रही है गौशालाओं नंदिशालाओं में रह रहे गोवंश को इस बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया है और सैकड़ों की तादात में गौवंश की इस बीमारी से मृत्यु हो चुकी है। उन्होंने कहा कि उनके संज्ञान में है कि यही हालात अंबाला और दूसरे क्षेत्रों में भी हैं। सिहाग ने कहा कि एक तरफ अधिक बारिश व फसली बीमारी के चलते किसानों की फसल खराब हो रही है तो दूसरी तरफ जो किसान डेयरी फार्म का काम करते हैं उनको इस बीमारी के चलते घाटा बढ़ रहा है इस प्रकार से किसानों को दोहरी मार पड़ रही है।सिहाग ने कहा कि इसी बीमारी से जून के महीने में पंजाब में तकरीबन 400 गौधन की मृत्यु हुई थी जो कि पंजाब के मुक्तसर व बठिंडा जिले से संबंधित थे जो कि हमारे विधानसभा क्षेत्र डबवाली के बिल्कुल साथ लगता है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों में राजस्थान व गुजरात में करीब 3000 पशुओं की मृत्यु लंपी स्किन बीमारी से हो चुकी है।विधायक ने कहा कि क्या सरकार के पास इसकी जानकारी नहीं थी? और अगर जानकारी थी तो इसके लिए सरकार ने ठोस कदम क्यों नहीं उठाए? उन्होंने बढ़ रही इस बीमारी के तीन कारण भी सरकार को बताए जो कि निम्नलिखित हैं:
1. उन्होंने कहा कि पशु चिकित्सकों की कमी इस बीमारी के फैलाव में सबसे बड़ा कारण है उन्होंने हलका डबवाली का उदाहरण देते हुए बताया कि डबवाली में 37 पद स्वीकृत हैं लेकिन उनमें से केवल 15 पदों पर वीएलडीए तैनात हैं और 22 पोस्ट खाली हैं,वहीं वेटरनरी सर्जन के 9 पदों में से केवल 4 पर सर्जन तैनात हैं और पशु चिकित्सकों की कमी के चलते मौके पर पशुओं को इलाज नहीं मिल पा रहा और बीमारी फैल रही है।
2. उन्होंने कहा कि गौशालाओं और नदीशालाओं की स्थिति दयनीय है अगर किसी गोवंश को यह बीमारी लग जाती है तो उसको अलग से रखने के लिए उनके पास जगह नहीं है, उपयुक्त चारे के लिए पैसे नहीं है। बीमार गोधन को अन्य गोवंश के साथ रखने के कारण भी बीमारी का फैलाव हो रहा है। अगर सरकार समय रहते बीमार गोवंश को अलग रखने का प्रबंध करवाती तो यह बीमारी नहीं फैलती।
3. सिहाग ने तीसरा कारण सीमांतर क्षेत्र में अन्य राज्यों द्वारा लगाई जा रही पशु मंडियों को बताया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार का नियम है कि कोई भी राज्य 50 किलोमीटर तक दूसरे राज्य की सीमा के पास पशु मंडी नहीं लगा सकता, लेकिन हमारे विधानसभा डबवाली के बिल्कुल साथ सटे गांव किल्लीयावाली में पशु मंडी लगाई जाती है जिससे चलते वहां से जो पशु कारगर नहीं होते उनको छोड़ दिया जाता है और वो हरियाणा में आ जाते हैं जिनके कारण जहां जानमाल का नुकसान होता है वही उनसे भी बीमारी हरियाणा में फैली है।
अमित सिहाग ने इसके साथ ही सरकार को अपनी तरफ से इस बीमारी की रोकथाम हेतु सुझाव भी दिए जोकि निम्नलिखित हैं:
1. उन्होंने बताया कि इस बीमारी के लिए वैक्सीनेशन एक कारगर हथियार है और गोट पॉक्स नामक वैक्सीन इसके लिए उत्तम है जिसका उपयोग गुजरात मे नेशनल डेयरी बोर्ड द्वारा व्यापक स्तर पर किया गया है। उन्होंने कहा कि अगर इस बात की पुष्टि हो जाती है कि यह बीमारी कैपरी पॉक्स बीमारी का ही रूप है तो उसके लिए उपरोक्त दवाई कारगर सिद्ध हो सकती है।
2. उन्होंने कहा कि सरकार को जिन क्षेत्रों में यह बीमारी फैली हुई है वहां पर अपने स्तर पर फागिंग करवानी चाहिए ताकि मच्छर आदि कीटों से इस बीमारी का फैलाव अन्य पशुओं तक ना हो।
3. सरकार को एक हेल्पलाइन नंबर जारी करना चाहिए ताकि जरूरत पड़ने पर नंदीशाला और गौशालाओं के संचालक उस नंबर पर संपर्क करके आवश्यक जानकारी ले सकें।
अमित सिहाग ने सरकार से मांग की कि इस बीमारी से लड़ने के लिए सरकार गौशालाओं व नदीशालाओं को आर्थिक सहयोग दें व चारे के लिए कम से कम 50 रुपये प्रति गोधन चारे के लिए राशि दे।

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