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मंगलवार, फ़रवरी 19, 2019

मिलेनियम स्कूल के प्रांगण में रविदास जयंती मनाई गई

डबवाली न्यूज़ 
मिलेनियम स्कूल के प्रांगण में संत रविदास जी की 642 वीं जयंती मनाई गई स्कूल के शिक्षकों ने धर्म पूज्य संत रविदास जी को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि नमन किया इस अवसर पर स्कूल के अध्यक्ष ने बताया कि समानता और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए संत रविदास जी ने जो नियमित संदेश दिया वे सदा हमें प्रेरित करता रहेगा समाज में समानता आने से ही सब का विकास संभव है गुरु रविदास जी का जन्म वाराणसी के गांव में हुआ संत जी की गिनती भारत के ही नहीं बल्कि सारे विश्व में महान संतों में की जाती है उन्होंने समाज की कुरीतियों को दूर करने के लिए कई कार्य किए हैं संत रविदास बहुत ही सरल हृदय के थे और दुनिया का आडंबर छोड़कर हृदय की पवित्रता पर बल देते थे। इस बारे में उनकी एक कहावत - "जो मन चंगा तो कठौती में गंगा" काफी प्रचलित है। इस कहावत को जोड़कर एक कथा भी है। कहते हैं कि एक बार एक महिला संत रविदास के पास से गुजर रही थी। संत रविदास लोगों के जूते सिलते हुए भगवान का भजन करने में मस्त थे। तभी वह महिला उनके पास पहुंची और उन्हें गंगा नहाने की सलाह दी। फिर क्या मस्तमौला संत रविदास ने कहा कि जो मन चंगा तो कठौती में गंगा। यानी यदि आपका मन पवित्र है तो यहीं गंगा है। कहते हैं इस पर महिला ने संत से कहा कि आपकी कठौती में गंगा है तो मेरी झुलनी गंगा में गिर गई थी। ..तो आप मेरी झुलनी ढ़ूढ़ दीजिए। इस पर संत रविदास ने अपनी चमड़ा भिगोने की कठौती में हाथ डाला और महिला की झुलनी निकालकर दे दी। इस चमत्कार से महिला हैरान रह गई और उनके प्रसिद्धि के चर्चे दूर-दूर तक फैल गए। एक कथा के अनुसार रविदास जी अपने साथी के साथ खेल रहे थे। एक दिन खेलने के बाद अगले दिन वो साथी नहीं आता है तो रविदास जी उसे ढूंढ़ने चले जाते हैं, लेकिन उन्हे पता चलता है कि उसकी मृत्यु हो गई। ये देखकर रविदास जी बहुत दुखी होते हैं और अपने मित्र को बोलते हैं कि उठो ये समय सोने का नहीं है, मेरे साथ खेलो। इतना सुनकर उनका मृत साथी खड़ा हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि संत रविदास जी को बचपन से ही आलौकिक शक्तियां प्राप्त थी। लेकिन जैसे-जैसे समय निकलता गया उन्होंने अपनी शक्ति भगवान राम और कृष्ण की भक्ति में लगाई। इस तरह धीरे-धीरे लोगों का भला करते हुए वो संत बन गए। मिलेनियम स्कूल डबवाली ने बताया कि आज के समाज को उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए

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