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पाषाण युग की ओर लौटी सिरसा पुलिस ! बढ़ रही लूट व स्नेचिंग की वारदातें, नंबर बनाने के लिए सट्टा खाईवालों पर मामले दर्ज कर रही पुलिस

Dabwalinews.com
सिरसा। नवनियुक्त पुलिस अधीक्षक डा. अर्पित जैन से सिरसावासियों को ऐसी उम्मीद थी कि वे सुनियोजित अपराध का खात्मा करेंगे।उनके नेतृत्व में पुलिस मादक पदार्थ तस्करों की रीढ़ तोडऩे का काम करेगी। पुलिस सुनियोजित ढंग से क्राइम करने वालों को उनके बिलों से दबोचकर सलाखों के पीछे भेजेगी। भ्रष्टचारियों को उनके अंजाम तक पहुंचाएगी। लेकिन प्रतीत होता है कि केवल कप्तान बदले है, व्यवस्था वहीं पुरानी चल रही है। सट्टा खाईवालों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान से तो यही प्रतीत होता है कि जिला पुलिस पाषाण युग की ओर लौट रही है। जब जिला में लूट व स्नेचिंग की वारदातें घटित हो रही हो, तब पुलिस विभाग सट्टा खाईवालों के खिलाफ की गई कार्रवाई का ढिंढोरा पीट रहा है। वर्णनीय है कि पिछले 20 दिनों में लूट व स्नेचिंग की आठ से अधिक वारदातें घटित हो चुकी है। लूट व स्नेचिंग का शिकार पुलिस कर्मचारी, बिजली कर्मचारी भी हो चुके है। यह तथ्य भी सामने आ चुका है कि बाइक सवार लोगों द्वारा वारदात को अंजाम दिया जाता है। यह कि एक बाइक पर तीन-तीन सवार लोग रात्रि में 8 बजे से 11 बजे के बीच घटना को अंजाम देते है। पीडि़तों ने बताया गया कि दो बाइक पर छह लोग अथवा तीन बाइक पर 9 लोगों ने लूटपाट की। इसके बावजूद जिला पुलिस इस गिरोह का पर्दाफाश करने में नाकाम साबित हुई है। जबकि जिला पुलिस पिछले एक पखवाड़े से 200-500 रुपये का सट्टा पकडऩे में लगी है। थाना प्रभारी, सीआईए प्रभारी की ओर से 1000-500 के सट्टा पकड़े जाने की विज्ञप्ति जारी करवाई जा रही है। सरकारी खजाने से भारी भरकम वेतन लेने वाले पुलिस अधिकारी इन दिनों सट्टा खाईवालों के खिलाफ कार्रवाई में जुटे है? जबकि सट्टा खाईवालों को पुलिस थाना में ही जमानत मिल जाती है और सजा भी मामूली आर्थिक दंड है। पुलिस अपराधियों के खिलाफ अपना लक्ष्य बड़ा निर्धारित क्यों नहीं करती?
नवनियुक्त पुलिस अधीक्षक डा. अर्पित जैन से यह उम्मीद की जा रही थी कि उनके दिशा-निर्देश पर जिला पुलिस अपराधियों का खात्मा करेगी। जिला को मादक पदार्थों की तस्करी से मुक्ति दिलाएगी। अपराध पर अंकुश लगाएगी। लेकिन जिस राह पर पुलिस चल रही है, उससे क्राइम पर नियंत्रण की उम्मीद बेमानी दिखाई पड़ रही है।

चौगुणा हुआ सट्टे का कारोबार

सिरसा पुलिस द्वारा सट्टे के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। जबकि इस धंधे ने जड़े इतनी गहरी जमा ली है कि सट्टा खाईवाली अब सामान्य बात हो गई है। इसकी मुख्य वजह शासन-प्रशासन की विफलता भी है। चूंकि कुछ वर्ष पहले तक देश में एक ही सट्टा लगता था। लोग दिन में दांव लगाने के बाद रिजल्ट का अगली सुबह होने का इंतजार करते थे। लेकिन अब चार-चार जगहों से सट्टा संचालित होता है। अब सायं 6 बजे फरीदाबाद के सट्टे के परिणाम घोषित होते है। इसके बाद रात्रि साढ़े 8 बजे गाजियाबाद के और रात्रि साढ़े 11 बजे चंडीगढ़ उर्फ गली के परिणाम घोषित होते है। दिल्ली के सट्टे का रिजल्ट अगले दिन ही घोषित होता है। यानि सट्टा लगाने वालों के पास चार-चार मौके होते है। परिणाम स्वरूप पहले दिहाड़ी, मजदूरी करने वालों तक सीमित सट्टाखाईवाली अब मध्यम वर्ग में भी पैठ बना चुकी है। जब शासन-प्रशासन सट्टे का संचालन करने वालों पर रोक नहीं लगा सकीं, तब सिरसा पुलिस सट्टा खाईवालों की धरपकड़ करके क्या हासिल कर लेगी?

असरदार के प्रभाव में पुलिस!
जिला पुलिस द्वारा जब भी किसी अपराधी की धरपकड़ की जाती है, तब पुलिस अधिकारी प्रेस कांफ्रेस करके इसका बखान करते है। मगर, जब प्रभावशाली लोग पुलिस की गिरफ्त में आते है, तब उन पर पर्दा डाला जाता है। पुलिस द्वारा जब-जब क्रिकेट बुकीज की धरपकड़ की गई, मीडिया से उनका बचाव किया गया। यानि आम व खास में फर्क करना नहीं भूलती पुलिस। इसका मतलब असरदार लोगों के प्रभाव में है पुलिस!

शहर को संभालों एसपी साहब!
अपराध के मामले में सिरसा शहर पर पुलिस का नियंत्रण दिखाई नहीं पड़ता। पिछले कई वर्षों में शहर थाना अपराधियों पर अंकुश लगाने में नाकाम रहा है। कई बार शहर थाना के प्रभारी भी बदले जा चुके। लेकिन अपराधी जब-तब वारदात करके फरार हो जाते है। ऐसे में पुलिस कप्तान से गुजारिश है कि वे सिरसा शहर की सुध लें। शहर में पुलिस गश्त बढ़ाए अथवा अन्य तरीका अपनाए। मगर, सिरसा शहरी क्षेत्र में अपराधियों पर अंकुश लगाए।

फर्जी फर्म संचालकों पर करें कार्रवाई
पुलिस को हमेशा बड़ा टास्क लेना चाहिए। संसाधनों का इस्तेमाल सुनियोजित ढंग से अपराध करने वालों के खात्मे में किया जाना चाहिए। जो लोग फर्जी फर्में बनाकर सरकारी राजस्व को चपत लगा रहे है। ऐसे लोगों को सलाखों के पीछे भेजना चाहिए। सिरसा फर्जी फर्मों की राजधानी के रूप में पहचाने जाने लगा है। फर्जी फर्मों के सरगनाओं के लिए यह सुरक्षित ठिकाना बना हुआ है। सैकड़ों मामले दर्ज होने के बाद भी फर्जी फर्म संचालक खुले घूम रहे है। पुलिस अधीक्षक डा. अर्पित जैन से यह उम्मीद की जा रही है कि वे सरकारी खजाने को चपत लगाने वाले फर्जी फर्म संचालकों को सलाखों के पीछे भेजेंगे। मगर, अभी पुलिस सट्टा खाईवालों के पीछे लगी है। फर्जी फर्म संचालकों का नंबर आने में देर है?

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