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देरी करने पर गेहूं घोटाले के मामले में पुलिस से जवाब तलबी, फर्जी फर्मों पर चुप्पी क्यों?

मई-2018 में दर्ज की गई थी एफआईआर नंबर 377, 378 व 379
Dabwalinews.com
सिरसा। पुलिस महानिदेशक द्वारा 15 हजार क्विंटल गेहूं घोटाले की एफआईआर पर तीन वर्ष तक कार्रवाई न करने पर तत्कालीन पुलिस अधिकारियों से जवाब तलबी की है। f
सिरसा पुलिस ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के तत्कालीन डीएफएससी अशोक बांसल की शिकायत पर 2017 में मामला दर्ज किया था। दिसंबर-2020 में इस मामले में पहली धरपकड़ की गई थी। इसके बाद पुलिस ने दर्जनभर विभागीय अधिकारी और डिपू होल्डरों को गिरफ्तार किया। लेकिन मई-2018 यानि तीन वर्ष बीत जाने पर भी शहर थाना सिरसा में फर्जी फर्मों के मामलों को लेकर दर्ज की गई एफआईआर पर आजतक कोई कार्रवाई नहीं हुई। मामले में नामजद लोग आज भी खुले घूम रहे है। अचरज की बात तो यह है कि एफआईआर नंबर 379 तो पुलिस महानिरीक्षक मंडल हिसार के इंस्पेक्टर जयबीर सिंह की शिकायत पर दर्ज किया गया था। जबकि एफआईआर नंबर 377 व 378 पीडि़त लोगों द्वारा फर्जी फर्मों के सरगनाओं के खिलाफ दर्ज करवाए गए थे।
सवाल यह है कि जब पुलिस विभाग दर्ज एफआईआर के मामले में ढील बरतने वाले पुलिस अधिकारियों से जवाब तलबी कर सकता है, तब सरकार को टैक्स की चपत लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने में देरी क्यों कर रहा है? पुलिस द्वारा तीन वर्ष पहले एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन एक भी मामले में आजतक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की गई? जोकि पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाती है। अचरज तो इस बात का है कि इन मामलों में नामजद लोगों को पुलिस का जरा भी खौफ नहीं है। उनके चेहरों पर कोई शिकन नहीं है।सरकार की ओर से फर्जी फर्मों के संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करने के बड़े-बड़े दावे किए जाते है, लेकिन पुलिस ने जो एफआईआर दर्ज की है, उन्हें ही आजतक सिरे नहीं चढ़ाया। सीधा सवाल यह है कि आईजी हिसार के निर्देश पर इंस्पेक्टर जयबीर सिंह द्वारा गलत अथवा झूठी एफआईआर दर्ज करवाई गई? यदि शिकायत वाजिब थी तब पुलिस को कार्रवाई करने से किसने रोका? सवाल यह है कि क्या पुलिस अमीर-गरीब देखकर काम करेगी? सवाल यह भी है कि आखिर पुलिस पर किसका दबाव है? पुलिस ने पहले एफआईआर नंबर 379 किसके कहने पर दर्ज की और अब तक किसके कहने पर कार्रवाई करने से गुरेज कर रही है? पुलिस प्रशासन को इसका जवाब देना होगा?
एक नजर एफआईआर नंबर 379 पर

थाना शहर सिरसा में यह एफआईआर आईजीपी कार्यालय के इंस्पेक्टर जयबीर सिंह की शिकायत पर दो मई 2018 को दर्ज की गई। जिसमें महेश बांसल पुत्र चानन मल, प्रमोद बांसल पुत्र सुरेश कुमार व पवन कुमार पुत्र सत्यनारायण के खिलाफ भादंसं की धारा 420, 467, 468, 471, 120बी के तहत मामला दर्ज किया गया था।
शिकायत में इंस्पेक्टर जयबीर सिंह ने कहा कि उन्हें सक्षम अधिकारियों द्वारा फर्जी फर्मों के मामले में प्रारंभिक जांच के निर्देश दिए गए। जिस पर उन्होंने गहन छानबीन की। उन्होंने गणेश ट्रेडर्स दुकान नंबर 20ए, प्रथम मंजिल नई अनाज मंडी और इसके प्रोपराटर पवन कुमार पुत्र सत्यनारायण मकान नंबर 482, गली नंबर 1, बेगू रोड की तलाश की। मंडी में ज्ञात हुआ कि यहां पर गणेश ट्रेडर्स नाम से कोई दुकान नहीं है। पवन के पिता सत्यनारायण ने बताया कि उन्होंने पुत्र को बेदखल किया हुआ है।शिकायत में बताया गया कि उन्हें मुखबीरों से पता चला कि पवन, प्रमोद पुत्र सुरेश और महेश बांसल पुत्र चाननमल निवासी सेक्टर-19 हुडा कालोनी सिरसा के साथ मिलकर फर्जी फर्मों का कारोबार करता है। पड़ताल में यह भी ज्ञात हुआ कि गणेश टे्रडर्स का इक्विटास बैंक शाखा में खाता खोला हुआ था। इसके अलावा अन्य बैंक शाखाओं में भी इस फर्म के खाते थे। शहर सिरसा पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया था।

एफआईआर नंबर 377 पर एक नजर

 शहर सिरसा थाना में यह एफआईआर गुलशन कुमार पुत्र कृष्ण कुमार निवासी गुसाईआना की शिकायत पर 2 मई 2018 को दर्ज किया गया था। इस एफआईआर में रविंद्र पुत्र देवीलाल, रमेश पुत्र मदन लाल व महेश बांसल पुत्र चाननमल को नामजद किया गया था। इसमें गुलशन कुमार की ओर से बताया गया कि वह दिहाड़ी मजदूरी करता था। काम की तलाश में उसका संपर्क रविंद्र निवासी सोतर भट्टू (फतेहाबाद)से हुआ। रविंद्र ने उसे मंडी में चाय-पानी पिलाने के काम पर 10 हजार रुपये महीना पर लगवा दिया। रविंद्र ने उसे बैंक में खाता खुलवाने के लिए कहा। उसने बताया कि कारोबारी रमेश पुत्र मदनलाल निवासी फतेहाबाद और महेश बांसल उसके जानकार है। रविंद्र ने उसके नाम से भगवती टे्रडर्स 10सीसी एडिशनल मंडी के नाम से फर्म बना दी। उसका कोटक महेंद्रा बैंक में खाता भी खुलवा दिया। एक दिन रविंद्र, महेश बांसल और रमेश जोकि महेश बंासल की दुकान पर थे, उसे बैंक में कैशियर भूपेंद्र से मिलकर पैसे लाने के लिए कहा। बैंक में कैशियर ने हस्ताक्षर करवाकर उसे पैसे दे दिए, जोकि उसने इन्हें लाकर दे दिए। कुछ दिन पहले महेश बांसल के भावदीन टोल प्लाजा पर एक करोड़ 10 लाख रुपये नगद पकड़े गए। तब पता चला कि इनका काला कारोबार है और वे फर्जी फर्मों के माध्यम से टैक्स की चोरी करते है। इन लोगों ने उसके जैसे कई भोले-भाले गरीब व जरूरतमंद लोगों को फांसकर उनके नाम से फर्जी फर्में बनाकर टैक्स चोरी का धंधा किया हुआ है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया।

एक नजर में एफआईआर नंबर 378

 यह एफआईआर भी शहर सिरसा पुलिस द्वारा 2 मई 2018 को दर्ज की गई थी। गांव छतरियां निवासी विकास ढेहरू पुत्र हरबंस लाल की शिकायत पर पुलिस ने रमेश पुत्र मदनलाल, रविंद्र पुत्र देवीलाल, महेश बांसल पुत्र चाननमल, प्रमोद बांसल पुत्र सुरेश कुमार व सुनील पुत्र जसवंत राय के खिलाफ भादंसं की धारा धारा 420, 467, 468, 471, 120बी के तहत मामला दर्ज किया गया था।पुलिस में दर्ज करवाई शिकायत में विकास ढेहरू ने बताया कि वह नागरिक अस्पताल में कान्ट्रेक्ट बेस पर इलेक्टिशियन का कार्य करता हूं। उसने बताया कि आरोपी रविंद्र उसके दोस्त प्रदीप की बुआ का लड़का है। प्रदीप उसके साथ पढ़ता था। उसने बताया कि रविंद्र ने बताया कि उसके नाम से फर्म बनाते है ताकि भविष्य में उसे लोन मिल सकें। उसने बताया कि रमेश पुत्र मदनलाल की फतेहाबाद कपास मंडी में दुकान है, जबकि महेश बांसल पुत्र चाननमल का सिरसा में बड़ा कारोबार है। ये लोग भी उनकी मदद करेंगे। इसके बाद विकास कॉटन एंड आयॅल मिल नजदीक ओबीसी मेन रोड ङ्क्षडग नाम से फर्म बनाई और उसका खाता इक्विटास बैंक जनताभवन रोड में खुलवाया। यहां से चैक बुक जारी करवाई और हरेक चैक पर उसके हस्ताक्षर करवा लिए। उसे नहीं मालूम की कि उसके बैंक खाते में कितने पैसे जमा हुआ और कितने निकाले गए। उसे अब पता चला कि रविंद्र, रमेश निवासी फतेहाबाद का भांजा सुनील और महेश बांसल का भतीजा प्रमोद बांसल सभी मिलकर फर्जी फर्मों का कारोबार करते है। उसने बताया कि फर्जी फर्मों के इस खेल में कई बैंकों के अधिकारी, कर्मचारी, थोक किरयाणा व्यापारी, पैट्रोल पंप संचालक, रूई व ग्वार के कारोबारी, स्टील व स्क्रेप के कारोबारी सम्मिलित है।
हिसार से सिरसा लौटे मामले

 फर्जी फर्मों के मामलों को सिरे चढ़ाने के लिए हिसार रेंज के पुलिस महानिरीक्षक की ओर से एसआईटी गठित की गई थी। लगभग सभी मामलों को सभी मामलों को जांच के लिए एसआईटी को सौंपा गया था। लेकिन एसआईटी की जांच पर सवालिया निशान लगने लगे। आईजी संजय सिंह के तबादले के साथ ही फर्जी फर्मों के मामलों की जांच जिला पुलिस के पास लौट आई है। नवनियुक्त आईजी राकेश आर्य ने इस आश्य की तस्दीक की कि रेंज में ऐसी जांच करने वाली कोई एसआईटी नहीं है। इसलिए ऐसे मामलों की जांच जिला पुलिस ही करेगी। लेकिन तीन साल से लटके इन मामलों में देरी के लिए किसे जिम्मेवार ठहराया जाएगा, यह जांच का विषय है?

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