BREAKING NEWS

Post Top Ad

Your Ad Spot
�� Dabwali न्यूज़ है आपका अपना, और आप ही हैं इसके पत्रकार अपने आस पास के क्षेत्र की गतिविधियों की �� वीडियो, ✒️ न्यूज़ या अपना विज्ञापन ईमेल करें dblnews07@gmail.com पर अथवा सम्पर्क करें मोबाइल नम्बर �� 9354500786 पर

मोबाइल पर समाचार सुने के लिए कृपया निचे दिया काले रंग के स्पीकर को दबाएं

मंगलवार, अक्तूबर 13, 2020

पूर्व एसडीएम व रीडर पर घूसखोरी के आरोप,बडागुढ़ा के व्यक्ति की शिकायत पर मुख्य सचिव ने दिए जांच के आदेश

डबवाली न्यूज़ डेस्क
मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से पूर्व एसडीएम डा. विजेंद्र कुमार के खिलाफ जांच के आदेश दिए है। मुख्य सचिव की ओर से जांच के आदेश जिला के गांव बड़ागुढ़ा निवासी करनबीर सिंह पुत्र बलजिंद्र सिंह की शिकायत पर दिए गए है।करनबीर की ओर से मुख्यमंत्री, डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला, स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज सहित आला अधिकारियों को ई-मेल के जरिए शिकायत की थी। शिकायत में एसडीएम डा. विजेंद्र सिंह व रीडर धर्मपाल पर 5-5 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य सचिव की ओर से मामले की जांच करवाने के आदेश दिए है। शिकायतकत्र्ता करनबीर सिंह की ओर से भेजी गई शिकायत में बताया कि एसडीएम की कोर्ट में भरण-पोषण का एक मामला चल रहा था। जिसकी एवज में उनसे रिश्वत की मांग की गई थी। उसकी ओर से 5-5 लाख रुपये की राशि देने से इंकार करने पर दूसरी पार्टी जसबीर सिंह से घूस लेकर उसके खिलाफ नियम विरुद्ध फैसला सुनाया गया है। शिकायतकत्र्ता ने बताया कि उसका एसडीएम कोर्ट में केस संख्या 12डीबीएल/एमडब्ल्यू चल रहा था। जिसमें उसके चाचा की ओर से अपने भरण-पोषण का दावा किया गया था। एसडीएम के रीडर धर्मपाल की ओर से केस उसके पक्ष में करने की एवज में 10 लाख रुपये की मांग की गई थी, जिसे उसने इंकार कर दिया था। शिकायतकत्र्ता ने उच्चाधिकारियों को भेजी शिकायत में बताया कि तत्कालीन एसडीएम डा. विजेंद्र कुमार ने घूस लेकर पूरी तरह से गलत फैसला सुनाया और तमाम तथ्यों और सबूतों को दरकिनार कर दिया। उसने बताया कि वह याचिकाकत्र्ता का भतीजा है और रिश्तेदार की श्रेणी में आता है, इसलिए उसके खिलाफ वाद का ग्राऊंड ही नहीं था। यदि उसका चाचा संतानहीन होता, तब उसकी जवाबदेही बनती, जबकि उसके चाचा की तीन संतान है। एक पुत्र और दो पुत्रियां। उसका असल पुत्र होने के बावजूद उसे भरण-पोषण के लिए जवाबदेह बनाया गया है। एसडीएम ने मामले में उसे अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया, न ही उससे इस बारे में पूछा गया और न ही उसकी कोई स्टेटमेंट ही ली गई। शिकायतकत्र्ता ने आरोप लगाया कि मामले में फैसला 27 जुलाई 2020 को दिया गया और उस फैसले पर हस्ताक्षर 29 जुलाई 2020 को किए गए। उसने आरोप लगाया कि उसके खिलाफ फैसला उस दिन सुनाया गया, जब उनका तबादला हो गया था और उन तक घूस की राशि पहुंच गई थी। उसने बताया कि मामले में फैसला 23 को सुनाया जाना था, लेकिन उसे 27 तक इसलिए टाल दिया गया, चूंकि उसके साथ रिश्वत की सौदेबाजी हो रही थी। उसकी ओर से जब 10 लाख रुपये देने से इंकार किया गया, तब दूसरे पक्ष से घूस लेकर उनके पक्ष में फैसला सुनाया गया। शिकायतकत्र्ता करनबीर की ओर से बताया गया कि याचिकाकत्र्ता के पुत्र व पत्नी के पास काफी प्रोपर्टी है। उनके पास बंगला, प्लॉट और बाइक व कारें भी है। उसकी ओर से दूसरे पक्ष की तमाम प्रोपर्टी का उल्लेख किया गया है। शिकायतकत्र्ता ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाए जाने और घूस लेकर दिए गए फैसले के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की थी। मुख्य सचिव की ओर से इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए मामले की जांच के आदेश दिए है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि आखिर आरोपों में कितनी सच्चाई है?

कोई टिप्पणी नहीं:

AD

पेज