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कराधान विभाग के अधिकारियों की संलिप्तता से ही होता है प्रदेश में टैक्स चोरी का खेल,विभागीय जांच में अनेक अधिकारियों के चेहरे हुए बेनकाब

कराधान आयुक्त ने डीईटीसी सिरसा को दिए तत्कालीन ईटीओ डीपी बैनीवाल, अनिल मलिक, मालाराम, अशोक सुखीजा, एईटीओ ओपीएस अहलावत, हनुमान सैनी टीआई के खिलाफ मामला दर्ज करवाने के आदेश
डबवाली न्यूज़ डेस्क 
प्रदेश में हजारों करोड़ के टैक्स चोरी का खेल आबकारी एवं कराधान विभाग के ही भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से अंजाम दिया गया।इसी विभाग में टैक्स चोरी करने के सरगना पोषित किए गए और विभाग से ही उन्हें बच निकलने का तरीका सुझाया गया। कराधान विभाग के ही भ्रष्ट अधिकारियों ने अपनी हद से पार जाकर फर्जी फर्मों को करोड़ों रुपये का रिफंड दिया। जिन फर्मों से टैक्स की उग्राही करने के लिए उनका धरती पर कोई ठिकाना दिखाई नहीं दे रहा, विभागीय अधिकारियों ने उन्हें अपने हाथों से रिफंड देने का कारनामा किया है।कराधान विभाग द्वारा फर्जी फर्मों के खिलाफ की गई विभागीय जांच में अनेक भ्रष्ट अधिकारियों के चेहरे बेनकाब हो चुके है। टैक्स चोरी का यह खेल पिछले दो दशकों से आसमान को छुआ। अकेले सिरसा में ही दर्जनभर अधिकारी टैक्स चोरी के खेल में लिप्त पाए गए। विभाग की ओर से कुछेक के खिलाफ पहले ही पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाई जा चुकी है और आधा दर्जन के खिलाफ मामला दर्ज करवाने की सिफारिश की जा चुकी है। ऐसे में सिरसा में कार्यरत इन अधिकारियों ने अपने कार्यकाल के दौरान फर्जी फर्मों को पोषित करने का काम किया। उनके द्वारा की जा रही टैक्स चोरी पर न केवल आंखें मूंदे रखी बल्कि उन्हें करोड़ों रुपये का रिफंड भी लौटा दिया। कराधान आयुक्त हरियाणा की ओर से सिरसा में कार्यरत रहे आधा दर्जन अधिकारियों के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करवाने के लिए 22 नवंबर 2019 को पत्र क्रमांक 3030 के माध्यम से डीईटीसी सिरसा को आदेश दिया गया था। जिसमें तत्कालीन ईटीओ डीपी बैनीवाल, अनिल मलिक, मालाराम, अशोक सुखीजा, एईटीओ ओपीएस अहलावत, हनुमान सैनी टीआई के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाने के लिए कहा गया। लेकिन लगभग एक वर्ष का लंबा अरसा बीत जाने पर भी इन अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया गया है। चूंकि प्रदेश के गृहमंत्री अनिल विज ने अब मामले की कमान स्वयं संभाल ली है, ऐसे में देश को टैक्स के रूप में चपत लगाने वालों की अब खैर नहीं है। विभागीय जांच में जिन अधिकारियों को दोषी पाया गया है, उनका बच पाना अब आसान नहीं होगा।
 फर्मों पर मामले दर्ज, अधिकारियों को ढील क्यों?
आबकारी एवं कराधान विभाग द्वारा पुलिस में डेढ़ दर्जन से अधिक फर्मों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाया गया है। इन फर्मों के खिलाफ मामला दर्ज करवाने के आदेश भी कराधान आयुक्त हरियाणा की ओर से नवंबर-2019 में ही दिए गए थे। इन आदेशों की लगभग 11 माह बाद पालना हुई और इसी सप्ताह में विभिन्न थानों में मामले दर्ज हुए। सवाल यह है कि जब फर्जी फर्मों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए, तब कराधान आयुक्त के आदेश पर इन फर्जी फर्मों से संलिप्त विभागीय अधिकारियों के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करवाने में देरी क्यों की जा रही है? आखिर ढील किस ओर से बरती जा रही है? क्या कराधान विभाग के अधिकारी अपने सहकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज करवाने में जानबूझ कर देरी कर रहे है? या पुलिस विभाग की ओर से मामले में देरी की जा रही है? सवाल यह भी है कि आखिर कराधान आयुक्त हरियाणा के आदेशों की पालना करने की हिमाकत कौन कर रहा है? 
 कतार में कई डीईटीसी भी
 फर्जी फर्मों के खेल में विभागीय अधिकारियों पर गाज गिरना तय है। लंबे अरसे तक मामले को ठंडे बस्ते में डाला गया। टैक्स चोरों ने अपने मधुर रिश्तों से मामले को लटकाए रखा, लेकिन अब मामला गृह मंत्री अनिल विज के पास पहुंच गया है। अब बारी-बारी से भ्रष्ट अधिकारियों का नंबर आना तय है। सिरसा में कार्यरत रहें आधा दर्जन ईटीओ स्तर के अधिकारियों के खिलाफ कराधान आयुक्त हरियाणा द्वारा मामले दर्ज करवाने के आदेश दिए जा चुके है। इसके बाद मामले में तत्कालीन डीईटीसी जीसी चौधरी और एनके रंगा की भी बारी है। जिस विभागीय जांच में ईटीओ स्तर के अधिकारियों को दोषी करार दिया गया है, उसी जांच में इन डीईटीसी को भी दोषी पाया गया है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी फर्मों को करोड़ों रुपये का रिफंड लौटाया। ज्यों-ज्यों मामला आगे बढ़ेगा, भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला आगे बढ़ता ही चलेगा।
सीएम कर चुके अनुशंसा
 फर्जी फर्मों के मामले में कराधान विभाग के अधिकारियों की संलिप्तता सामने आने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए सीएम से अनुमति की जरूरत पड़ती है। सीएम मनोहर लाल भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टोलरेंस की नीति पर चलते है। उन्होंने इसी नीति पर चलते हुए अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करवाने की अनुशंसा अविलंब कर दी। लेकिन पिछले 11 माह से मामला अधर में झूल रहा है। यह जांच का विषय बन गया है कि कराधान विभाग की ओर से पुलिस में शिकायत भेजी जा चुकी है या नहीं? कराधान आयुक्त के आदेश कराधान विभाग के पास धूल फांक रहे है या पुलिस विभाग के पास?
ज्वाइंट कमीशनर पर भी है मामला दर्ज
आबकारी एवं कराधान विभाग के ज्वाइंट कमीशन, जिन पर टैक्स चोरों पर कार्रवाई की बड़ी जिम्मेवारी है। वे भी फर्जी फर्मों के साथ संलिप्तता मामले में आरोपी है। उनके खिलाफ स्टेट विजिलेंस ने अंबाला थाना में वर्ष 2009 में मामला दर्ज किया था। उस समय ज्वाइंट कमीशन हिसार शिव कुमार कुरुक्षेत्र में बतौर ईटीओ कार्यरत थे। फर्जी ठेकेदारों, समितियों, एजेंसियों को करोड़ों रुपये का तब रिफंड दिया गया था। विजिलेंस ने अपनी जांच के बाद कुरुक्षेत्र के तत्कालीन डीईटीसी एससी गुप्ता, ईटीओ शिवकुमार सहित दर्जनभर लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।विभागीय सूत्र बताते है कि विजिलेंंस में मामला दर्ज होने के बाद भी शिव कुमार ने विभाग में पदोन्नति हासिल की और अब हिसार में पिछले पांच साल से बतौर ज्वाइंट कमीशनर तैनात है। सिरसा के टैक्स चोरी के मामलों की पड़ताल उनके द्वारा ही की जाती है। फर्जी फर्मों के संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की किससे अपेक्षा की जाए, जब विभाग में बड़े स्तर पर बैठे अधिकारी भी दागदार हों?
ईमानदार अधिकारी झेल रहें प्रताडऩा!
ऐसा नहीं है कि कराधान विभाग में ईमानदार अधिकारियों का टोटा है। हकीकत यह है कि विभाग में भ्रष्ट अधिकारियों का अधिक बोलबाला है, लेकिन ईमानदार अधिकारियों की वजह से ही सरकारी खजाना बचा हुआ है। अन्यथा भ्रष्ट अधिकारियों ने तो लुटवाने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी। पीड़ादायक बात तो यह है कि जिन ईमानदार अधिकारियों द्वारा अपने कत्र्तव्य की पालना सही ढंग से की जाती है और जो सरकारी खजाने के चौकीदार बनकर कार्य कर रहे है, उन्हें सरकार के स्तर पर भी कोई प्रोत्साहन नहीं मिला। बल्कि झूठी शिकायतों, सीएम विंडो, आरटीआई के माध्यम से गैंग ने प्रताडि़त करने का ही काम किया। विभाग में आज भी ईमानदार अधिकारी तमाम प्रकार की प्रताडऩा झेलते हुए भी सच्चाई की राह पर चल रहे है।

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