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मंगलवार, सितंबर 15, 2020

बदस्तूर जारी है फर्जी फर्मों का कारोबार, खुले घूम रहें फर्जी फर्म संचालक,दंतविहिन साबित हो रही एसआईटी


डबवाली न्यूज़ डेस्क(इंदरजीत अधिकारी की विशेष रिपोर्ट )
टैक्स चोरी और टैक्स रिफंड के माध्यम से सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले फर्जी फर्म संचालकों के खिलाफ कारगर ढंग से कार्रवाई करने के लिए गठित की गई एसआईटी (विशेष जांच टीम) दंतविहिन साबित हो रही है। एसआईटी के गठित होने के बावजूद फर्जी फर्मों का कारोबार बदस्तूर जारी है और इन फर्जी फर्मों के संचालक खुलेआम घूम रहे है।
अनेक मामलों में नामजद हो चुके फर्जी फर्म संचालक सफेदपॉश बने हुए है और एसआईटी उनके समक्ष बौनी साबित हो रही है। वर्णनीय है कि लगभग दो वर्ष पूर्व फर्जी फर्मों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसआईटी का गठन किया गया था।फर्जी फर्मों के सरगनाओं के कारोबार की राजधानी सिरसा बना हुआ है। यहां से ही न केवल हरियाणा बल्कि देश के विभिन्न प्रदेशों में फर्जी फर्मों का कारोबार संचालित किया जाता रहा है। फर्जी फर्मों के माध्यम से इन धंधेबाजों ने सरकार को टैक्स की चपत लगाई, वहीं सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये का रिफंड भी हासिल कर लिया। जब-जब भी इन फर्जी फर्मों की तलाश की गई तो धरातल पर कहीं कुछ दिखाई नहीं दिया। सूत्र बताते है कि बड़े शातिराना अंदाज से कारोबार करने वाले इन लोगों ने पैसे के बल पर अपना बचाव भी किया। जब-जब भी इनकी गर्दन की ओर हाथ बढ़े, ऐसे लोगों ने पैसे से अपनी ओर बढऩे वाले हाथों को रोक दिया। परिणाम स्वरूप आज भी वे खुले घूम रहे है और उनका अवैध कारोबार यथावत जारी है।आश्चर्यजनक है कि जिस उद्देश्य के लिए एसआईटी का गठन किया गया था, वह अपना उद्देश्य हासिल कर पाने में नाकाम साबित होती दिखाई दे रही है। सूत्रों की मानें तो एसआईटी के पास विशेषज्ञ जांच अधिकारियों की टीम है और न ही अधिक अधिकार ही प्राप्त है। इसके साथ ही एसआईटी पर काम का भी बोझ डाल दिया गया है। चूंकि सिरसा जिला व अन्य जिला में दर्ज फर्जी फर्मों के मामले की जांच इसी एसआईटी को सौंप दी जाती है। जिसकी वजह से एसआईटी को निर्णायक कार्रवाई करने में अब तक सफल नहीं हो पाई है। एसआईटी के गठन से जो उम्मीद जगी थी, वह नाउम्मीदी में तब्दील हो रही है। चूंकि फर्जी फर्मों के सरगना आज भी खुले घूम रहे है।
आर्थिक अपराध सैल अधिक होता कारगर!
हर जिला में पुलिस विभाग की ओर से आर्थिक अपराध सैल का गठन किया गया है। जिसमें आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ पुलिस अधिकारियों को शामिल किया जाता है। इस सैल के अधिकारियों द्वारा आर्थिक अपराध की अनेक गुत्थियां सुलझायी जा चुकी है। फर्जी फर्मों के मामले भी यदि इन्हीं आर्थिक अपराध सैल को सौंपे जाते, तब उनसे कारगर कार्रवाई की अपेक्षा की जा सकती थी। चूंकि वे स्थानीय स्तर पर कार्य करते और उन्हें क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थिति का भी ज्ञान होता है। इसके साथ ही उन्हें अपने क्षेत्र में सूत्रों से भी केस सुलझाने के लिए जानकारी प्राप्त हो जाती है। ऐसे में फर्जी फर्मों के मामले में एसआईटी की बजाए आर्थिक अपराध सैल को सौंपे जाने से बढिय़ा रिजल्ट की उम्मीद की जा सकती थी।
खुद शिकायतकत्र्ता, खुद ही जांचकत्र्ता = परिणाम शून्य
फर्जी फर्मों के मामले में फजीहत का एक उदाहरण यह है कि फर्जी फर्मों के कारोबारियों के खिलाफ पुलिस द्वारा दो मामले पीडि़तों की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर किए गए। जबकि एक मामला पुलिस द्वारा अपने स्तर पर किया गया। यानि पुलिस स्वयं शिकायतकत्र्ता बनकर सामने आए। पुलिस ने ही मामले की जांच करनी थी। ऐसे में उम्मीद जगी थी कि अब निर्णायक कार्रवाई होगी। पुलिस मामले को अंजाम तक पहुंचाएगी और मामले में आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाएगी। लेकिन परिणाम? परिणाम वहीं ढाक के तीन पात ही रहा। वजह क्या रहीं? यह पुलिस विभाग ही बेहतर बता सकता है?
मामला शीशे जैसा साफ, फिर भी अड़चन
फर्जी फर्मों के सरगनाओं एमआरपी द्वारा किस प्रकार कारोबार किया गया? किस प्रकार सरकारी खजाने को चपत लगाई गई? किस प्रकार फर्जी तरीके से फर्में बनीं और किस प्रकार टैक्स की चपत हुई। फर्जी फर्मांे के काले कारोबार से कौन-कौन जुड़ा है, यह सब शीशे जैसा साफ हो चुका है। चूंकि टैक्स चोरी मामले में अनुपम सिंगला जैसे कई लोग पुलिस के हाथ लग चुके है। उनसे पूछताछ में पूरे रैकेट की जानकारी सामने आ चुकी है। लेकिन एसआईटी फर्जी फर्मों के धंधे के मगरमच्छों के खिलाफ कार्रवाई करने में क्यों हिचक रहा है? यहीं यक्ष प्रश्न बना हुआ है।
बोगस सी-फार्म के 235, जीएसटी के 62 मामले दर्ज
प्रदेशभर में बोगस सी-फार्मों के माध्यम से टैक्स चोरी करने और बोगस तरीके से रिफंड हासिल करने के 235 मामले दर्ज हो चुके है। सी-फार्मों के माध्यम से लगभग 3000 करोड़ रुपये का घोटाला किया जा चुका है। जबकि देश में एक जुलाई 2017 से लागू हुए जीएसटी एक्ट के बाद प्रदेश में 62 मामले दर्ज हो चुके है। जीएसटी लागू होने के बाद 14000 करोड़ रुपये के घोटाले सामने आ चुके है। लेकिन टैक्स चोरी का धंधा करने वालों के खिलाफ कोई निर्णायक कार्रवाई आज तक सामने नहीं आ पाई है।
एमआरपी दे रहें चुनौती
फर्जी फर्मों के माध्यम से सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वालों में शुमार एमआरपी सबसे बड़ी चुनौती बने हुए है। फर्जी फर्मों के करोबार से अकूत संपत्ति अर्जित करने वाले ये लोग अपने पैसेे के बल पर अपना बचाव कर रहे है। इसी वजह से ही अनेक प्रभावशाली लोग उनके परौकार बने हुए है। फर्जी फर्मों के माध्यम से टैक्स चोरी करने वाले महेश बांसल सहित अन्य लोगों के खिलाफ मामले दर्ज होने के बावजूद उनकी धरपकड़ नहीं की गई, ऐसे लोग शासन-प्रशासन के लिए खुली चुनौती बने हुए है।

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