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ऐलनाबाद के दंगल में उतरेंगे पवन बैनीवाल! दो बार लड़े भाजपा की टिकट पर, अब कांग्रेस से उम्मीदवारी मानी जा रही तय

Dabwalinews.com
सिरसा। तीन कृषि कानूनों का विरोध करते हुए लगभग पांच माह पूर्व सत्तारूढ़ भाजपा को अलविदा कहने वाले जिला के कद्दावर नेता पवन बैनीवाल ने आज कांग्रेस ज्वाइन कर ली। इसके साथ ही उन्होंने ऐलनाबाद उपचुनाव में उतरने का परोक्ष रूप से ऐलान कर दिया है।
निकट भविष्य में ऐलनाबाद विधानसभा के चुनाव होने है। यह सीट इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला के इस्तीफा दिए जाने से खाली हुई थी। श्री चौटाला ने 27 जनवरी को कृषि कानूनों के विरोध में अपने विधायकी से इस्तीफा सौंप दिया था। ऐलनाबाद सीट से दो बार भाजपा के उम्मीदवार रहे पवन बैनीवाल की वजह से चुनाव बेहद रोमांचक रहा था और दोनों में कड़ी टक्कर रही थी। भाजपा ने उनकी लोकप्रियता की वजह से उन्हें चुनाव में जीत हासिल न करने के बावजूद हरियाणा बीज विकास निगम का चेयरमैन नियुक्त किया था। उन्होंने भाजपा में रहकर किसानों और क्षेत्र के विकास के लिए कार्य किया। उन्होंने दशकों पुरानी समस्याओं के हल के लिए कार्य किया। चूंकि पवन बैनीवाल का अपना व्यक्तिगत वोट बैंक है। इस वजह से उनकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई ।Pawan Bainiwal will enter the riots of Ellenabad! Fought twice on BJP ticket, now it is being considered as a candidate for Congress




बीती 20 अप्रैल 2021 को पवन बैनीवाल ने एकाएक भाजपा छोडऩे का ऐलान किया। उन्होंने किसानों के धरने में शामिल होकर पार्टी छोडऩे की घोषणा की थी और कृषि कानूनों की खिलाफत की थी। उनके भाजपा छोडऩे को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे। कुछेक को ऐसा लगने लगा था कि ऐलनाबाद का चुनाव अब रोचक नहीं रहेगा। मगर, पवन बैनीवाल ने राजनीतिक दंगल में बने रहने के लिए कांग्रेस में शुमार होने की घोषणा कर दी। कांग्रेस को भी इस सीट पर ऐसे कद्दावर नेता की नितांत आवश्यकता थी, जोकि उन्हें विजय दिला सकें। चूंकि कृषि कानूनों को लेकर सत्तारूढ़ दल के खिलाफ माहौल बना हुआ है। ऐसे में कांग्रेस को जनसमर्थन मिलने की काफी उम्मीद है। राजनीति के जानकारों के अनुसार भाजपा की टिकट पर चुनाव में उतरते समय उन्हें व्यक्तिगत प्रयासों का ही लाभ मिला। चूंकि भाजपा की ग्रामीण एरिया में खास पैंठ नहीं है। जबकि कांग्रेस की टिकट पर चुनाव मैदान में उतरने पर उन्हें पार्टी वोट बैंक का काफी लाभ होगा। माना जा रहा है कि निकट भविष्य में होने वाले ऐलनाबाद उपचुनाव में पवन बैनीवाल कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में ताल ठोंकेगे। श्री बैनीवाल के कांग्रेस में शामिल होने से इस क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों पर भी भारी अंतर आना तय है। जिसके परिणाम शीघ्र आना तय है।

दिखाया था दमखम

पवन बैनीवाल ने भाजपा में शामिल होने के बाद पहली बार ऐलनाबाद सीट से वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्होंने 57623 वोट प्राप्त किए। लेकिन वे इनेलो नेता अभय सिंह को पराजित नहीं कर सकें। भाजपा ने वर्ष 2019 के चुनाव में उन्हें फिर मैदान में उतारा। इस बार उन्होंने अपने बलबूते 45133 वोट हासिल किए। पवन बैनीवाल ने ही भाजपा को इस क्षेत्र में पहचान दी।

जनसमस्याओं के लिए टकरा गए

पवन बैनीवाल ने ऐलनाबाद हलका के 14 गांवों की लगभग 25 हजार एकड़ में सेम की समस्या के समाधान के लिए कई बार आवाज उठाई। सीएम हरियाणा द्वारा 17 करोड़ की घोषणा किए जाने के बावजूद इस समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसी प्रकार मंगाला फलड़ी चैनल की मांग भी पूरी नहीं हुई। सीएम ने वर्ष 2014 में शेरांवाली पेरलल माइनर की घोषणा की थी, लेकिन सात साल का लंबा अरसा बीत जाने पर धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। श्री बैनीवाल ने ऐलनाबाद और नाथूसरी चौपटा में दो स्टेडियम बनाने की मांग की थी, ये भी पूरी नहीं हुई। उन्होंने चोपटा में कालेज बनाने और ऐलनाबाद में आईटीआई बनाने की मांग शुरू की थी, लेकिन इन मांगों को भी पूरा नहीं किया गया। पवन बैनीवाल द्वारा सत्तारूढ़ भाजपा को छोडऩे की वजह क्षेत्र की उपेक्षा को माना जाता है। जनसमस्याओं के लिए वे सत्ताधारी दल से टकरा गए और जनता के बीच पहुंच गए। जिस दौर में लोग सत्तारूढ़ दल में घुसने की कोशिश करते है, उस दौर में श्री बैनीवाल ने सत्ता का मोह त्यागकर जनता को सर्वोपरि माना।

दिल्ली में हुए शामिल

वरिष्ठ नेता पवन बैनीवाल आज दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस में शामिल हुए। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुमारी शैलजा, हरियाणा कांग्रेस प्रभारी विवेक बांसल की अगुवाई में उन्होंने विधिवत कांग्रेस ज्वाइन की।

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