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पब्लिक को पढ़ा रहे पाठ, खुद उड़ा रहे धज्जियां , घरों से गीला-सूखा अलग-अलग एकत्रित करके एकसाथ किया जा रहा डंप

Dabwalinews.com

 नगर परिषद के अधिकारियों व ठेकेदार की कथित मिलीभगत की वजह से शहरवासियोंके साथ भद्दा मजाक किया जा रहा है।
शहरवासियों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाते हुए गीला और सूखा कूड़ा अलग-अलग रखने के लिए कहा जा रहा है। घर-घर से जो कूड़ा अलग-अलग एकत्रित किया जाता है, उसे कचरा प्वाइंट पर एक साथ ही डंप किया जाता है। एकत्रित कूड़े को बाद में जेसीबी की मदद से ट्रालियों में लादकर बकरियांवाली प्लांट में भेजा जाता है।को स्वच्छ बनाने की दिशा में बेहतरीन कदम उठाया गया था कि कचरे को घर से ही अलग-अलग छांटा जाए। कचरे के निस्तारण के लिए आम पब्लिक ने सहयोग के लिए हाथ भी बढ़ाया। नगर परिषद की ओर से घर-घर से कचरा एकत्रित करने वाली गाडिय़ों के भी दो हिस्से किए। एक तरफ गीला कूड़ा और दूसरी ओर सूखा कूड़ा एकत्रित किया गया। मगर, जिस लक्ष्य को लेकर यह योजना बनाई गई, वह लक्ष्य अधर में ही लटक गया। चूंकि घर-घर से अलग-अलग एकत्रित कूड़ेको निकट के कचरा प्वाइंट पर डंप किया जाता है। इन प्वाइंट पर एकत्रित कचरे को एकसाथ डाल दिया जाता है। बिना किसी भेदभाव के। गीला और सूखा कचरा, सब एक साथ। इसके बाद जेसीबी की मदद से इस कचरे को ट्रालियों में भरा जाता है। गीला-सूखा सब एकसाथ बकरियांवाली प्लांट पहुंचाया जाता है।

सवाल यह है कि जब प्लांट पर गीला-सूखा कूड़ा एकसाथ ही पहुंचाया जाना है, तब नौटंकी किस बात की? क्यों लोगों को बेवकूफ बनाया जाता है? क्यों लोगों को अलग-अलग डस्टबिन रखने के लिए कहा जाता है? अनेक सवाल है जो अनुत्तरित है।

डस्टबिन की खरीद पर खर्चे करोड़ रुपये

सिरसा को स्वच्छ बनाने और कचरे के निस्तारण के लिए सिरसा नगर परिषद ने लगभग एक करोड़ रुपये की राशि डस्टबिन की खरीद पर ही खर्च डाली। सरकारी स्तर पर डस्टबिन खरीदे गए है। परिषद द्वारा 30 हजार से अधिक छोटे डस्टबिन और 650 से अधिक बड़े डस्टबिन खरीदे गए है। कुछेक बाजारों में तो दुकानदारों को नीले-हरे रंग के डस्टबिन बांटे भी गए है। सड़क के किनारों पर कुछ डस्टबिन लटकाए भी गए है। मगर, करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद लक्ष्य कैसे हासिल किया जा सकता है, जब कचरा प्वाइंट पर डंप पर गीले-सूख कचरे को एकसाथ ही डाला जाता है। 

किस की जवाबदेही?

गीले-सूखे कचरे के नाम पर हो रही नौटंकी के मामले में आखिर किसकी जवाबदेही है? सिरसा नगर परिषद के अधिकारियों की या ठेकेदार की? घरों से जो कचरा एकत्रित किया जाता है, उसे तहां-तहां खुले में फेंक दिया जाता है। जो कचरा पुरानी हाऊसिंग बोर्ड कालोनी, डबवाली रोड पर सिरसा क्लब के निकट, डाकघर के निकट, हिसार रोड पर बस स्टेंड के पास, सिंगिकाट मोहल्ला के निकट व अन्य जगहों पर डंप किया जाता है, वहां भी कचरे को अलग-अलग नहीं रखा जाता। ना ही कचरे को ट्रालियों में डालते समय अलग-अलग रखा जाता। फिर यह नौटंकी कचरा एकत्रित करने तक ही क्यों सीमित है? आखिर किसकी शह पर यह खेल खेला जा रहा है और इसका क्या प्रयोजन है? 

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