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गुरुवार, दिसंबर 31, 2020

पुलिस गिरफ्त में आया खाद्य एवं आपूर्ति विभाग का 'मगरमच्छ', पुलिस रिमांड पर अन्य सहयोगियों के नामों का खुलासा होना तय

Dabwalinews.com
पुलिस द्वारा गठित एसआईटी ने लगभग तीन करोड़ के गेहूं घोटाले के मास्टरमाइंड को दबोचने में सफलता हासिल की है।एसआईटी पहली बार किसी मगरमच्छ को दबोचने में कामयाब हो पाई है। सरकारी विभागों में सक्रिय 'मगरमच्छों' की वजह से जहां जनता त्रस्त थी, वहीं सरकार की भी किरकिरी हो रही थी। पुलिस ने जींद में जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक के रूप में कार्यरत राजेश आर्य को बुधवार को दबोचने का काम किया। हालांकि राजेश आर्य की द्वारा पुलिस गिरफ्त से बचने के लिए अदालत से अग्रिम जमानत हासिल करने का भी प्रयास किया था। लेकिन अदालत ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार नहीं की थी।सिरसा में बतौर डीएफएससी कार्यरत रहें राजेश आर्य के कार्यकाल में ही 15 हजार क्विंटल का गेहूं घोटाला हुआ था। वर्ष 2017 में तत्कालीन डीएफएससी अशोक बांसल की शिकायत पर आधा दर्जन अधिकारियों सहित 58 डिपू होल्डरों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। लगभग तीन वर्षों तक मामले को दबाने की कोशिश की गई। लेकिन उच्च न्यायालय के निर्देश पर पुलिस ने एसआईटी गठित की। पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह के नेतृत्व में पुलिस ने इस रैकेट में शामिल अधिकारियों व डिपू होल्डरों की गिरफ्तारी का अभियान छेड़ा। पुलिस ने 9 दिसंबर को जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी नरेंद्र सरदाना, एएफएसओ जगतपाल, इंस्पेक्टर संजीव कुंडू, सेवानिवृत्त अशोक कुमार, कान्फेड के स्टोर कीपर रविंद्र कुमार व सेवानिवृत्त स्टोर कीपर महेंद्र मेहता को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 21 दिसंबर को डिपू होल्डर नरेश सैनी, उसके भाई गोपी सैनी व विजय को गिरफ्तार किया था। शेष आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की धरपकड़ जारी है।

विजिलेंस जांच के नाम पर वसूली का दिखाया था डर
लाखों लीटर मिट्टी के तेल का घोटाला करने मामले में बताया जाता है कि तत्कालीन डीएफएससी राजेश आर्य ने अपने सहयोगियों के साथ डिपू होल्डरों से वसूली का प्रयास भी किया था। मिट्टी के तेल के घोटाले की जांच विजिलेंस को सौंपी गई थी। डिपू होल्डरों से विजिलेंस जांच को प्रभावित करने के लिए हरेक से 10-10 हजार रुपये की मांग की गई थी और लगभग 60 लाख रुपये बटोरने की कोशिश की गई थी। डिपू होल्डरों द्वारा शोर मचाए जाने पर उसके मंसूबे कामयाब नहीं हो पाए थे।

कई विभागों में सक्रिय है 'मगरमच्छ'!

पुलिस की ओर से खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ जोरदार अभियान छेड़ा हुआ है। जिन लोगों ने सरकारी धन का गबन किया, उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जा रहा है और गबन की राशि वसूलने का भी प्रयास किया जा रहा है। अभी कई ऐसे महकमे है, जिनमें सफाई किए जाने की जरूरत है। इनमें नगर परिषद सिरसा व आबकारी एवं कराधान विभाग प्रमुख है। इन विभागों के घोटाले भी सामने आ चुके है। लेकिन अभीतक कारगर कार्यवाही अमल में नहीं लाई गई है। जब इन 'मगरमच्छोंÓ को दबोचा जाएगा, तभी तालाब साफ हो पाएगा। लोगों को भ्रष्ट अधिकारियों की कार्यशैली से निजात मिलेगी, वहीं अन्य को भी यह संदेश जाएगा कि बुरे काम का बुरा नतीजा होता है।

दिखाते है लीगल नोटिस का भय


जब-जब भ्रष्ट अधिकारियों की कारगुजारियों को एक्सपोज किया जाता है, तब-तब ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा या तो प्रलोभन देने की कोशिश की जाती है या फिर मीडिया को दबाने के लिए लीगल नोटिस भेजने का डर दिखाया जाता है। करोड़ों रुपये के गेहूं घोटाले में जेल में बंद एक अधिकारी की ओर से ऐसा ही प्रयास किया गया था, जब उसने कथित मानहानि की बात कहते हुए 50 लाख रुपये के हर्जाने का नोटिस जारी किया था। इस अधिकारी पर पीले-गुलाबी व हरे राशनकार्ड बनाने की एवज में उपभोक्ताओं से वसूली गई राशि डकारने का भी आरोप है।

5 दिन के पुलिस रिमांड पर गए राजेश आर्य

गेहूं घोटाले के आरोप में गिरफ्तार किए गए जींद के डीएफएससी राजेश आर्य को पुलिस ने आज अदालत में पेश किया और अदालत से पांच दिन का रिमांड मांगा। अदालत ने पुलिस के आग्रह को स्वीकार करते हुए राजेश आर्य को पांच दिन के लिए पुलिस रिमांड पर सौंप दिया है। पुलिस रिमांड अवधि में सिरसा में डीएफएससी रहें राजेश आर्य से 15 हजार क्विंटल के गेहूं घोटाले के बारे में जानकारी जुटाएगी। यह गेहंू किन लोगों को बेचा गया। मामले में कौन-कौन संलिप्त है। उनसे खुर्दबुर्द किए रिकार्ड की भी बरामद की जाएगी। इसके साथ ही करोड़ों रुपये की रिकवरी का भी प्रयास किया जाएगा।

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