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Dabwali Fire Tragedy - 23 दिसंबर 1995 का वो काला दिन भुलाए से भी भुलाया नही जा सकता, जब आग जलती रही मानवता तड़पती रही

Dabwalinews.com
23 दिसंबर 1995 का वो काला दिन भुलाए से भी भुलाया नही जा सकता क्योंकि इसी दिन राजीव मेरिज प्लेस में डीएवी पब्लिक स्कूल के वार्षिक उत्सव के दौरान दोपहर 1.47 बजे घटित ह्रदय विदारक अग्निकांड में उपस्थित लगभग 1500 दर्शको में से 442 लोग अकाल मृत्यु का ग्रास बने एवं लगभग 150 लोग घायल हुए।
वह दिन जब आग जलती रही मानवता तड़पती रही
वह अभागा दिन जब शहर व आस पास का प्रत्येक व्यक्ति अपनी नम: आखों पर हाथ मलते रो कर कह रहा था, बचाओ, बचाओ, कोई इन्हे भी बचाओ। चारो तरफ चीत्कार, हाल दुहाई, एक तंदूर की भाति जल रहे डबवाली के राजीव पैलेस में नन्ही-नन्ही आत्माए, वो पुरुष वो महिलाये तड़प कर जान बचाने की कोशिश में इधर उधर भाग रहे थे। स्कूल का सातवां वार्षिक समारोह का दिन था, राजीव मैरिज पैलेस का प्रांगण जिसमें 1300 से अधिक डीएवी स्कूल के बच्चों व दर्शकों की भीड़, रंगारंग कार्यक्रम आरम्भ होने का समय प्रात: 11-20 से मुख्य अतिथि श्रीमति कुमारी शैलजा केन्द्रीय मंत्री ने इसका आरंभ करना था परन्तु उनका का प्रोग्राम रद्द हो गया उनकी जगह एमपी बिड़लान उपयुक्त सिरसा ने शुभ आरम्भ किया था। इस रंगारंग कार्यक्रम में 250 बाल कलाकार छात्र-छात्राओं ने अपनी कला का प्रदर्शन करना था खुशियों की घडिय़ां थी सैंकड़ों की संख्यां में वार्षिक इनाम पाने वाले कलाकृतियां दिखाने वाले, होनहार बच्चे, भविष्य के गायक, नृतक, अभिनेता, विद्यवान और बुद्धिमान, अपने-अपने भाई, बहनों और माताओं के साथ रंग-बिरंगी पोशाकें पहने दुल्हन की तरह सज-धज कर पंडाल में पहुचें थे। रंग-बिरंगे पोशाकों में बच्चे वाटिका में खिली नन्ही-मुन्नी कलियां और पुष्पों के खिलने की सौंदर्यानुभूति करवा रहे थे मानो बसंत ऋतू का उत्सव मानाने आज ऋतूराज पधारे हो डबवाली के एसडीएम सोमनाथ कम्बोज गेस्ट ऑफ ऑनर परिवार सहित पधारे थे। श्री प्रेम चन्द्र डीएसपी, सरदार गुरुदेव सिंह शांत, नगर की अन्य गणमान्य हस्तियां, बच्चों के माता-पिता, बहने एवं स्कूल के 700 विद्यार्थी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे। सजा हुआ पंडाल और मंच कार्यक्रम आरम्भ हुआ अभी कार्यक्रम थोड़ा ही चला था की प्रत्यदर्शी के अनुसार 1-45 बजे पर डॉ. रवि भटेजा सपरिवार पंडाल में पधारने वाले आखरी दम्पति थे और 1.47 बजे मुख्य द्वार पर तांत के परदे से शुरू हुई आग ने देखते ही देखते पुरे पंडाल को अपनी लपटों में ले गई। ढाई से तीन मिनट में सब कुछ तहस-नहस हो गया। 
और इस आग के शोलों ने बहुत से लोगों को अपनी चपेट में लिया। वह दिन डबवाली के लिए अत्यंत भयानक दिन था यह एक ह्रदय विदारक खौफनाक घटना थी, रूह कांप उठती है जब उस दिन की ह्रदय विदारक घटना की याद आती है। इस अग्निकांड से समूची मानवता सिहर गयी और वक्त थम सा गया शहर में सन्नाटा छा गया सब स्कूल कॉलेज दुकाने बंद हो गई शहर का ही नहीं पुरे विश्व का कोई ऐसा इंसान न था जो इस दुख और दर्द के समुद्र में न डूबा हो समझ में नहीं आ रहा था की कौन किसके घर पर संवेदना और शोक प्रकट करने के लिए जाये क्योंकि शहर के अधिकांश घर इस आग का शिकार थे, शवों का दाह संस्कार करने के लिए श्मशानघाट की जगह कम पड गई। मानवता की वो तड़प, आज भी सभी के दिलोंं को कुरेद रही है। इस काण्ड में कितने घायल और कितने ही परिवार उजड़े, इसकी कल्पना मात्र से है आखें बरबस छलक आती है। डबवाली के भीषण अग्निकांड ने समूचे राष्ट्र की आत्मा को झंझोर कर रख दिया। अग्निकाण्ड पीडि़त परिवार आज भी अपनों से बिछड़ी आत्माओं का टकटकी लगाए कभी भी ना खत्म होने वाला इंतजार करते है। मन में ये भी विचार आता है कि अगर आज वो बच्चे इस दुनिया में होते तो कोई आईएएस तो कोई आईपीएस अफसर होता, लेकिन भगवान को शायद ये मंजूर नहीं था।

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क्या डबवाली में BJP की इस गलती को नजर अंदाज किया जा सकता है,आखिर प्रशासन ने क्यों नहीं की कार्रवाई