सफाई ठेकेदार के खिलाफ खोला मोर्चा,नगर पार्षदों ने अधिकारियों की 'मलाई' पर की चोट,उपायुक्त, सीएम, शहरी स्थानीय निकाय मंत्री व निदेशक को लिखा पत्र
डबवाली न्यूज़ डेस्क
शहर के आधे से अधिक नगर पार्षदों ने नगर परिषद के अधिकारियों की मलाई से भरी हांडी पर करारी चोट मारी है। उनकी ओर से सफाई ठेकेदार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सीएम मनोहर लाल, शहरी स्थानीय निकाय मंत्री अनिल विज, विभाग के निदेशक के अलावा जिला उपायुक्त को पत्र लिखा है। पत्र में ठेकेदार को सफाई का ठेका दिए जाने पर ऐतराज जताया है। पार्षदों की ओर से लिखे पत्र में कहा गया है कि विभागीय अधिकारियों की सांठगांठ के चलते पिछले कई वर्षों से एक ही सफाई ठेकेदार ठेका ले रहा है। जिसके द्वारा काम में अनियमितता बरती जाती है। शहरभर में सफाई का बुरा हाल रहता है। नगर पार्षदों द्वारा आवाज उठाए जाने पर पार्षदों से अभद्र व्यवहार किया जाता है। वर्णनीय है कि सिरसा शहर में 31 वार्ड है। इनमें से आधे से अधिक वार्डों के पार्षदों की ओर से पत्र में ठेकेदार डिंगमैन पॉवर को पुन: कार्य न दिए जाने की मांग की है। पत्र में बताया गया है कि नगर परिषद के कुछेक अधिकारी अपनी निजी लाभ के लिए ठेकेदार को लाभ पहुंचाते है। इसीलिए इस ठेकेदार के अनुसार ठेके की शर्तें तय करते है ताकि हर बार डिंगमैन पॉवर को ही ठेका अलॉट हो। पत्र में कहा गया है कि मामले में नगर परिषद के सफाई निरीक्षक की भी संलिप्तता है। बताया गया है कि गांव बकरियांवाली स्थित कूड़ा प्लांट में भी भारी अनियमितताएं बरती गई है। डिंगमैन पॉवर को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए दोगुणा दरों पर ठेका अलॉट कर दिया जाता है, जबकि दूसरी फर्म आधी दरों पर कार्य करने को तैयार है। नगर पार्षदों ने सीएम सहित आला अधिकारियों को लिखे पत्र में बताया कि सफाई ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाने की वजह से नगर परिषद को हर वर्ष लगभग 2 से 2.5 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है। नगर परिषद के अधिकारी इसी ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए ठेके में ऐसी-ऐसी शर्त शामिल कर देते है, जिन्हें कोई दूसरी फर्म पूरा नहीं कर सकती। केवल डिंगमैन पॉवर व उसकी सहयोगी फर्मे ही काम लेती है। नगर पार्षदों की ओर से पत्र में बताया गया है कि नगर परिषद की सफाई ठेकेदार फर्म डिंगमैन पॉवर की दक्षिणी हरियाणा विद्युत वितरण निगम में अनेक अनियमितताएं सामने आ चुकी है। कर्मचारियों की ईपीएफ, ईएसआई के मामले में अनेक शिकायतें मिलने पर डिंगमैन पॉवर के खिलाफ जांच चल रही है। ऐसे में सिरसा नगर परिषद को डिंगमैन पॉवर के चंगुल से छुड़वाया जाए।
2006 से है नप पर कब्जा!
मैसर्ज डिंगमैन पॉवर ने वर्ष 2006 में पहली बार नगर परिषद में कचरा एकत्रित करके उसे उठाने का ठेका लिया था। इसके बाद इस फर्म को सिरसा ऐसा रास आया कि पिछले 14 वर्षों से यही फर्म कार्य कर रही है। इस फर्म के मुकाबले कोई फर्म टिक ही नहीं पाती। अचरज की बात यह है कि डिंगमैन द्वारा हर बार टेंडर की शर्तों को पूरा किया जाता है, जबकि प्रतिद्वंदी फर्में इन शर्तों को पूरा ही नहीं कर पाती। यह भी अचरज की बात है कि जिन फर्मों को डिंगमैन फर्म रेट के मुकाबले पछाड़ती है, अगली बार रेट दोगुणा करने पर भी प्रतिद्वंदी फर्मे पिछड़ जाती है। डिंग मैन पॉवर द्वारा हर बार अपनी शर्तों पर ठेका लिया जाता है और नगर परिषद से करोड़ों रुपये कचरा कलेक्शन की एवज में बटोरा जाता है।
ठेके में 'पूलिंग' का खेल!
सूत्र बताते है कि सफाई के ठेेके में 'पूलिंगÓ का खेल खेला जाता है। नगर परिषद के कुछेक अधिकारियों की मिलीभगत से एक ही फर्म बार-बार ठेका हासिल करने में कामयाब रहती है। दरअसल, ठेके के समय चंद फर्मों द्वारा टेंडर की औपचारिकता पूरी की जाती है। जिसमें कुछेक फर्मे तो घर के सदस्यों अथवा रिश्तेदारों के नाम पर ही बनी होती है। इन फर्मों द्वारा चहेती फर्म को ठेका अलॉट करवाने के लिए ही रेट अधिक भरे जाते है। कागजों में टेंडर की औपचारिकता पूरी की जाती है और ठेका फिर से उसे ही अलॉट कर दिया जाता है, जिसे वे चाहते है। सिरसा में वर्ष 2009 से केवल चार फर्मे ही आवेदन करती है और हर बार डिंगमैन को ठेका अलॉट कर दिया जाता है।
बकरियांवाली प्लांट में हुआ था गोलमाल!
नगर परिषद द्वारा शहरभर से कूड़ा-कचरा उठाकर गांव बकरियांवाली स्थित कचरा प्लांट में पहुंचाने की एवज में हर माह ठेकेदार को लाखों रुपये का भुगतान किया जाता है। इसके भुगतान के लिए प्लांट पर कचरे का वजन किया जाता है। ठेके की शर्तों के अनुसार ठेकेदार शहर से भवन का मलबा इत्यादि उठाकर प्लांट पर नहीं ले जाएगा। जबकि बकरियांवाली प्लांट पर भवनों का मलबा देखा जा सकता है। इसके साथ ही इस प्लांट पर धर्मकांटे से छेड़छाड़कर वजन बढ़ाने के आडियो-वीडियो काफी समय पहले वायरल भी हो चुके है। विभागीय अधिकारियों की कथित मिलीभगत से पूरे मामले को दबा दिया गया। आज भी कचरा तुलाई के कार्य में अनियमितता की शिकायतें मिलती रहती है।
घर-घर से उठाने की है जिम्मेवारी
ठेके की शर्तों के अनुसार सफाई ठेकेदार को शहर के सभी वार्डों में घर-घर से कचरा उठाने की जिम्मेवारी है। ठेकेदार को यह भी हिदायत है कि वह सूखे व गीले कचरे को अलग-अलग एकत्रित करें। इसके साथ ही कचरे को ढंक कर ही ले जाया जाए। मगर, शहर में कितने घरों से कचरा एकत्रित किया जाता है, यह सर्वविदित है। इसके साथ ही ठेकेदार द्वारा गीले व सूखे कूड़े के लिए कोई बंदोबस्त नहीं किया गया है और न ही कूड़े को ढंकने की ही कोई व्यवस्था है। आलम तो यह है कि शहर के सीसी डस्टबिन से जो कूड़ा डंपर से उठाकर बकरियांवाली ले जाया जाता है, वह भी अधिकतर खुली ट्रालियों में ले जाया जाता है, जिसके कारण हवा के साथ यह कूड़ा बिखरता चला जाता है।
शहर के आधे से अधिक नगर पार्षदों ने नगर परिषद के अधिकारियों की मलाई से भरी हांडी पर करारी चोट मारी है। उनकी ओर से सफाई ठेकेदार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सीएम मनोहर लाल, शहरी स्थानीय निकाय मंत्री अनिल विज, विभाग के निदेशक के अलावा जिला उपायुक्त को पत्र लिखा है। पत्र में ठेकेदार को सफाई का ठेका दिए जाने पर ऐतराज जताया है। पार्षदों की ओर से लिखे पत्र में कहा गया है कि विभागीय अधिकारियों की सांठगांठ के चलते पिछले कई वर्षों से एक ही सफाई ठेकेदार ठेका ले रहा है। जिसके द्वारा काम में अनियमितता बरती जाती है। शहरभर में सफाई का बुरा हाल रहता है। नगर पार्षदों द्वारा आवाज उठाए जाने पर पार्षदों से अभद्र व्यवहार किया जाता है। वर्णनीय है कि सिरसा शहर में 31 वार्ड है। इनमें से आधे से अधिक वार्डों के पार्षदों की ओर से पत्र में ठेकेदार डिंगमैन पॉवर को पुन: कार्य न दिए जाने की मांग की है। पत्र में बताया गया है कि नगर परिषद के कुछेक अधिकारी अपनी निजी लाभ के लिए ठेकेदार को लाभ पहुंचाते है। इसीलिए इस ठेकेदार के अनुसार ठेके की शर्तें तय करते है ताकि हर बार डिंगमैन पॉवर को ही ठेका अलॉट हो। पत्र में कहा गया है कि मामले में नगर परिषद के सफाई निरीक्षक की भी संलिप्तता है। बताया गया है कि गांव बकरियांवाली स्थित कूड़ा प्लांट में भी भारी अनियमितताएं बरती गई है। डिंगमैन पॉवर को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए दोगुणा दरों पर ठेका अलॉट कर दिया जाता है, जबकि दूसरी फर्म आधी दरों पर कार्य करने को तैयार है। नगर पार्षदों ने सीएम सहित आला अधिकारियों को लिखे पत्र में बताया कि सफाई ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाने की वजह से नगर परिषद को हर वर्ष लगभग 2 से 2.5 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है। नगर परिषद के अधिकारी इसी ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए ठेके में ऐसी-ऐसी शर्त शामिल कर देते है, जिन्हें कोई दूसरी फर्म पूरा नहीं कर सकती। केवल डिंगमैन पॉवर व उसकी सहयोगी फर्मे ही काम लेती है। नगर पार्षदों की ओर से पत्र में बताया गया है कि नगर परिषद की सफाई ठेकेदार फर्म डिंगमैन पॉवर की दक्षिणी हरियाणा विद्युत वितरण निगम में अनेक अनियमितताएं सामने आ चुकी है। कर्मचारियों की ईपीएफ, ईएसआई के मामले में अनेक शिकायतें मिलने पर डिंगमैन पॉवर के खिलाफ जांच चल रही है। ऐसे में सिरसा नगर परिषद को डिंगमैन पॉवर के चंगुल से छुड़वाया जाए।
2006 से है नप पर कब्जा!
मैसर्ज डिंगमैन पॉवर ने वर्ष 2006 में पहली बार नगर परिषद में कचरा एकत्रित करके उसे उठाने का ठेका लिया था। इसके बाद इस फर्म को सिरसा ऐसा रास आया कि पिछले 14 वर्षों से यही फर्म कार्य कर रही है। इस फर्म के मुकाबले कोई फर्म टिक ही नहीं पाती। अचरज की बात यह है कि डिंगमैन द्वारा हर बार टेंडर की शर्तों को पूरा किया जाता है, जबकि प्रतिद्वंदी फर्में इन शर्तों को पूरा ही नहीं कर पाती। यह भी अचरज की बात है कि जिन फर्मों को डिंगमैन फर्म रेट के मुकाबले पछाड़ती है, अगली बार रेट दोगुणा करने पर भी प्रतिद्वंदी फर्मे पिछड़ जाती है। डिंग मैन पॉवर द्वारा हर बार अपनी शर्तों पर ठेका लिया जाता है और नगर परिषद से करोड़ों रुपये कचरा कलेक्शन की एवज में बटोरा जाता है।
ठेके में 'पूलिंग' का खेल!
सूत्र बताते है कि सफाई के ठेेके में 'पूलिंगÓ का खेल खेला जाता है। नगर परिषद के कुछेक अधिकारियों की मिलीभगत से एक ही फर्म बार-बार ठेका हासिल करने में कामयाब रहती है। दरअसल, ठेके के समय चंद फर्मों द्वारा टेंडर की औपचारिकता पूरी की जाती है। जिसमें कुछेक फर्मे तो घर के सदस्यों अथवा रिश्तेदारों के नाम पर ही बनी होती है। इन फर्मों द्वारा चहेती फर्म को ठेका अलॉट करवाने के लिए ही रेट अधिक भरे जाते है। कागजों में टेंडर की औपचारिकता पूरी की जाती है और ठेका फिर से उसे ही अलॉट कर दिया जाता है, जिसे वे चाहते है। सिरसा में वर्ष 2009 से केवल चार फर्मे ही आवेदन करती है और हर बार डिंगमैन को ठेका अलॉट कर दिया जाता है।
बकरियांवाली प्लांट में हुआ था गोलमाल!
नगर परिषद द्वारा शहरभर से कूड़ा-कचरा उठाकर गांव बकरियांवाली स्थित कचरा प्लांट में पहुंचाने की एवज में हर माह ठेकेदार को लाखों रुपये का भुगतान किया जाता है। इसके भुगतान के लिए प्लांट पर कचरे का वजन किया जाता है। ठेके की शर्तों के अनुसार ठेकेदार शहर से भवन का मलबा इत्यादि उठाकर प्लांट पर नहीं ले जाएगा। जबकि बकरियांवाली प्लांट पर भवनों का मलबा देखा जा सकता है। इसके साथ ही इस प्लांट पर धर्मकांटे से छेड़छाड़कर वजन बढ़ाने के आडियो-वीडियो काफी समय पहले वायरल भी हो चुके है। विभागीय अधिकारियों की कथित मिलीभगत से पूरे मामले को दबा दिया गया। आज भी कचरा तुलाई के कार्य में अनियमितता की शिकायतें मिलती रहती है।
घर-घर से उठाने की है जिम्मेवारी
ठेके की शर्तों के अनुसार सफाई ठेकेदार को शहर के सभी वार्डों में घर-घर से कचरा उठाने की जिम्मेवारी है। ठेकेदार को यह भी हिदायत है कि वह सूखे व गीले कचरे को अलग-अलग एकत्रित करें। इसके साथ ही कचरे को ढंक कर ही ले जाया जाए। मगर, शहर में कितने घरों से कचरा एकत्रित किया जाता है, यह सर्वविदित है। इसके साथ ही ठेकेदार द्वारा गीले व सूखे कूड़े के लिए कोई बंदोबस्त नहीं किया गया है और न ही कूड़े को ढंकने की ही कोई व्यवस्था है। आलम तो यह है कि शहर के सीसी डस्टबिन से जो कूड़ा डंपर से उठाकर बकरियांवाली ले जाया जाता है, वह भी अधिकतर खुली ट्रालियों में ले जाया जाता है, जिसके कारण हवा के साथ यह कूड़ा बिखरता चला जाता है।

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