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सोमवार, फ़रवरी 08, 2021

RTI में सूचना देने में देरी का मामला DFSC सुरेंद्र सैनी को आयोग का शोकॉज नोटिस,पूछा, क्यों न 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 25 हजार जुर्माना लगाया जाए

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आरटीआई एक्ट की पालना न करने और समय पर सूचना प्रदान न करने पर राज्य सूचना आयोग ने सिरसा के डीएफएससी-सह-राज्य जनसूचना अधिकारी को शोकॉज नोटिस जारी किया है। आयोग ने उनसे पूछा है कि क्यों न सूचना देने में देरी करने पर 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 25 हजार रुपये जुर्माना किया जाए। आयोग ने उन्हें लिखित जवाब देने के निर्देश दिए है।सूचना आयोग ने आरटीआई एक्टिविस्ट पवन पारिक एडवोकेट की शिकायत पर यह आदेश सुनाया। मामले की सुनवाई राज्य सूचना आयुक्त भूपेंद्र धर्माणी ने की। पवन पारिक एडवोकेट ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग से कुछ जानकारी प्राप्त करने के लिए 7 मार्च 2020 को आरटीआई दाखिल की। विभाग के राज्य जनसूचना अधिकारी-सह-जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक द्वारा निर्धारित समयावधि में सूचना प्रदान न करने पर पवन पारिक ने राज्य सूचना आयोग में 4 सितंबर 2020 को इसकी शिकायत की। मामला सुनवाई के लिए राज्य सूचना आयुक्त भूपेंद्र धर्माणी के पास पहुंचा। आयोग द्वारा मामले की सुनवाई के लिए 18 जनवरी को मामले की सुनवाई की गई। आयोग के समक्ष सुनवाई के दौरान डीएफएससी सुरेंद्र सैनी की ओर से अपना पक्ष रखते हुए बताया कि 7 मार्च को भेजा गया पत्र विभाग को 16 मार्च को प्राप्त हुआ। जिसे उन्होंने संबंधित कर्मी को अग्र-प्रेषित किया। वहां से 26 अप्रैल को जवाब प्राप्त हुआ, जिसे 30 अप्रैल को भेजने की तैयारी की गई। उन्होंने दलील दी कि आरटीआई एक्टिविस्ट की ओर से अपना पता जिला कोर्ट बताया गया था, चूंकि कोविड-19 की वजह से कोर्ट बंद थी, इसलिए इसे भेजा नहीं गया। बाद में इसे 22 अक्टूबर 2020 को भेजा गया। आयोग ने दोनों पक्षों को सुना। रिकार्ड का अवलोकन करने पर डीएफएससी की ओर से 22 अक्टूबर को पत्र भेजने का कोई रिकार्ड नहीं पाया गया। आयोग ने इसे सूचना देने में देरी माना और आरटीआई एक्ट के तहत शोकॉज नोटिस देने के आदेश सुनाए। आयोग की ओर से डीएफससी सुरेंद्र सैनी से यह भी पूछा गया है कि क्यों न उन पर सूचना देने में देरी के लिए 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया जाए। उन्हें शोकॉज नोटिस का लिखित में जवाब देने के आदेश दिए गए है।


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