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कपास संकट से मिट्टी-जल संरक्षण तक… मुख्यमंत्री के सामने किसान की सीधी आवाज डबवाली के प्रगतिशील किसान आशीष मेहता ने कृषि सुधारों पर रखे ठोस सुझाव

डबवाली | 16 जनवरी 2026 हरियाणा के राज्य बजट 2026-27 की तैयारियों के बीच किसानों की जमीनी समस्याएं सीधे सरकार तक पहुंचीं। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई परामर्श बैठक में किसान रत्न सम्मान से अलंकृत डबवाली क्षेत्र के प्रगतिशील किसान आशीष मेहता ने कृषि से जुड़े गंभीर मुद्दों पर व्यावहारिक और दूरगामी सुझाव दिए।

बैठक में दिए गए सुझावों की जानकारी आशीष मेहता ने शुक्रवार को डबवाली में आयोजित प्रेस वार्ता में साझा की। उन्होंने बताया कि डबवाली और आसपास के क्षेत्रों में कपास की खेती लगातार सिमट रही है, जो किसानों के लिए चिंता का विषय बन चुकी है।
कपास क्यों हो रही पीछे?

आशीष मेहता ने कहा कि कपास कभी इस क्षेत्र की प्रमुख नकदी फसल थी, लेकिन बढ़ती लागत, कीट प्रकोप, बीजों की गुणवत्ता पर सवाल, जल संकट और बाजार की अनिश्चितता के कारण किसान इससे दूर होते जा रहे हैं। इसका सीधा असर किसानों की आय और क्षेत्रीय कृषि संतुलन पर पड़ रहा है।

उन्होंने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में बीटी-3 कपास किस्मों पर प्रभावी शोध चल रहा है। यदि इन उन्नत किस्मों को वैज्ञानिक तरीके से और समय पर किसानों तक पहुंचाया जाए, तो कपास उत्पादन को फिर से मजबूती मिल सकती है।
उर्वरक टैगिंग पर उठाए सवाल

मेहता ने बैठक में उर्वरकों के साथ उत्पादों की टैगिंग व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग की। उन्होंने कहा कि टैगिंग के कारण किसान अपनी मिट्टी और फसल की वास्तविक जरूरत के अनुसार उर्वरक नहीं चुन पाता, जिससे लागत बढ़ती है और लाभ घटता है।

खारा पानी और हाइब्रिड धान से मिट्टी पर खतरा

उन्होंने बताया कि क्षेत्र में हाइब्रिड धान में खारे पानी के बढ़ते उपयोग से मिट्टी की सेहत बिगड़ रही है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन की उत्पादकता गंभीर संकट में पड़ सकती है।

तकनीक अपनाने पर दिया जोर

आशीष मेहता ने कहा कि किसानों को अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक, वैज्ञानिक और तकनीक-आधारित कृषि अपनानी होगी।
मृदा परीक्षण आधारित खेती
सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप-स्प्रिंकलर)
फर्टिगेशन तकनीक

इनसे पानी, उर्वरक और श्रम—तीनों की बचत संभव है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि प्रोत्साहन योजनाओं को और सरल व प्रभावी बनाया जाए।

प्रशिक्षण और फील्ड-डेमो की जरूरत

उन्होंने सुझाव दिया कि किसानों को तकनीक से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण, फील्ड-डेमो और शोध-आधारित मार्गदर्शन को मजबूत किया जाए। वैज्ञानिकों, शिक्षण संस्थानों और किसानों के बीच सशक्त समन्वय तंत्र विकसित करने की जरूरत बताई।

सरकार ने दिया भरोसा

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बैठक में स्पष्ट किया कि किसानों से मिले सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और व्यावहारिक व विकासोन्मुख प्रस्तावों पर प्राथमिकता से काम होगा, ताकि किसानों को समयबद्ध लाभ मिल सके।


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