बारिश की मार से किसान परेशान, पूर्व विधायक अमित सिहाग का CM को खुला पत्र
डबवाली - हरियाणा में भारी बारिश और जलभराव से त्रस्त किसानों के लिए राहत की गुहार लगाते हुए डबवाली के पूर्व विधायक अमित सिहाग ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को एक खुला पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने राज्य सरकार से किसानों की दुर्दशा पर तत्काल ध्यान देने और राहत पैकेज घोषित करने की मांग की है।
अमित सिहाग ने अपने पत्र में लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर आयोजित सेवा सप्ताह के दौरान जब देशभर में उत्सव का माहौल है, वहीं हरियाणा, पंजाब और उत्तर भारत के किसान गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनसेवा की भावना से प्रेरित होकर वे किसानों की समस्याओं को सरकार के सामने रख रहे हैं।
सिहाग के अनुसार हरियाणा में लगभग 30 लाख एकड़ भूमि जलभराव की चपेट में आई है, जिससे किसानों की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। विशेष रूप से जगाधरी और नीमा क्षेत्र में स्थिति अत्यधिक गंभीर है, जहां फसलों का 20 प्रतिशत से 70 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है।
धान-खेती करने वाले किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। प्रति एकड़ 10 से 12 क्विंटल तक की हानि हो रही है। हरियाणा सरकार को चाहिए था कि प्राकृतिक आपदा पीड़ित किसानों को 50,000 रुपए प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाता, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
पूर्व विधायक ने यह भी बताया कि केंद्र और हरियाणा सरकार ने 10 से 15 हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजे की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक किसानों के खातों में एक रुपया भी नहीं पहुंचा है। उन्होंने कहा कि जिस मुआवजे की घोषणा की गई है, उसका एक हिस्सा भी किसानों तक नहीं पहुंचा है, उल्टे उन्हें पोर्टल पर अपलोड करने की बात कही जा रही है।
अमित सिहाग ने मुख्यमंत्री से तीन प्राथमिक मांगें रखी हैं:
1. प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल सर्वे कराया जाए और वास्तविक नुकसान का आकलन किया जाए।
2. किसानों को 50,000 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से तत्काल मुआवजा दिया जाए।
3. राहत राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाए, जिससे बिचौलियों का खेल न चल सके।
सिहाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है बल्कि मानवीय संवेदना का विषय है। उन्होंने कहा कि सरकार को सेवक की भावना से किसानों की सेवा करनी चाहिए और उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान करना चाहिए।
किसानों की वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। अब देखना है कि हरियाणा सरकार इस मामले में कितनी संजीदगी दिखाती है।

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