“पुलिस की कमी से कानून व्यवस्था पर सवाल, चुनावों में पारदर्शिता जरूरी” — विधानसभा में अर्जुन चौटाला का बड़ा हमला
चंडीगढ़ | 22 दिसंबर हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन सदन में कानून व्यवस्था और चुनावी पारदर्शिता को लेकर बड़ा मुद्दा उठा। इनेलो विधायक अर्जुन चौटाला ने प्रश्नकाल के दौरान पुलिस विभाग में लंबे समय से खाली पड़े पदों को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया।
अर्जुन चौटाला ने सरकार से स्पष्ट सवाल किया कि राज्य में पुलिस विभाग के स्वीकृत पदों की कुल संख्या क्या है, इनमें से कितने पद वर्तमान में खाली हैं और जिलेवार व रैंकवार इसका पूरा ब्योरा क्या है। उन्होंने यह भी पूछा कि इन रिक्त पदों को भरने के लिए सरकार के पास कोई ठोस योजना है या नहीं और यदि है, तो भर्ती प्रक्रिया कब तक पूरी होगी।
उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में बड़ी संख्या में खाली पद होने से प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में सरकार बताए कि जब तक स्थायी भर्तियां नहीं होतीं, तब तक कानून व्यवस्था को संभालने के लिए क्या कोई वैकल्पिक या अंतरिम व्यवस्था की गई है।
इसके बाद सदन में चुनावी सुधारों पर चर्चा के दौरान अर्जुन चौटाला ने चुनाव प्रक्रिया के आधुनिकीकरण की जोरदार वकालत की। उन्होंने कहा कि आज देश और प्रदेश में चुनाव सुधार पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गए हैं, क्योंकि आम नागरिक खुद सवाल पूछने लगा है कि क्या चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है।
अर्जुन चौटाला ने कहा कि यदि सरकार की नीयत साफ है, तो हर बूथ और वीवीपैट मशीन को मतदाता के फिंगरप्रिंट से जोड़ा जाना चाहिए। ऐसा करने से हर मतदाता को यह भरोसा मिलेगा कि उसका वोट सही जगह पड़ा है। अगर कहीं फर्जी वोटिंग होती है, तो मतदाता खुद यह जान सकेगा कि उसके नाम पर वोट किसे दिया गया।
उन्होंने तर्क दिया कि जब एक सिम कार्ड खरीदने के लिए फिंगरप्रिंट देना पड़ता है, तो देश के लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए यह व्यवस्था चुनावों में क्यों नहीं लागू हो सकती। उन्होंने चुनावी अधिकारियों को बेहतर सुविधाएं देने और चुनावी बजट बढ़ाने की भी मांग रखी।
वोट चोरी के मुद्दे पर अर्जुन चौटाला ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनावी गड़बड़ियों की शुरुआत कांग्रेस के दौर में हुई। उन्होंने राज्यसभा चुनाव और पूर्व चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि वीवीपैट सत्यापन के दौरान भी कई सवाल सामने आए थे।
अर्जुन चौटाला ने कहा कि यदि सरकार चुनाव सुधारों पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाती, तो जनता का विश्वास कमजोर होगा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल और गहरे होंगे।

No comments:
Post a Comment